
सार
दिल्ली में अवैध पीजी का कारोबार करीब 20 हजार करोड़ रुपये तक पहुंचने का दावा किया गया है। आरोप है कि कई पीजी आवासीय मकानों के नाम पर चल रहे हैं, जबकि अंदर कमरों में बड़ी संख्या में छात्रों को रखा जाता है। इन जगहों पर फायर सेफ्टी, बिल्डिंग नियम, टैक्स और बिजली कनेक्शन से जुड़े नियमों की अनदेखी के आरोप हैं।
विस्तार
आवासीय मकानों के अंदर चल रहा PG का कारोबार
दिल्ली में छात्रों और कामकाजी युवाओं के लिए पीजी की मांग लगातार बनी हुई है। इसी मांग के बीच राजधानी के कई इलाकों में ऐसे पीजी संचालित होने की बात सामने आई है, जिनमें सुरक्षा और निर्माण संबंधी नियमों का पालन नहीं किया जा रहा।
जागरण की रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली में अवैध पीजी का कारोबार करीब 20 हजार करोड़ रुपये का हो चुका है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि यह कारोबार बड़े पैमाने पर असंगठित तरीके से चल रहा है और इससे सरकार को राजस्व का नुकसान हो रहा है।
चार-पांच मंजिला इमारत, अंदर छोटे-छोटे कमरे
रिपोर्ट के अनुसार, कई पीजी बाहर से सामान्य आवासीय इमारत दिखाई देते हैं। एमसीडी के रिकॉर्ड में भी कुछ इमारतें आवासीय मकान के तौर पर दर्ज हैं, लेकिन अंदर छोटे-छोटे कमरों में तीन से चार लोगों को रखा जाता है।
प्रति बेड करीब 8 से 15 हजार रुपये तक किराया वसूले जाने का दावा किया गया है। मुखर्जी नगर, लक्ष्मी नगर, राजेंद्र नगर, बेर सराय, कटवरिया सराय, सत्य निकेतन, विवेक विहार, हौजखास और मॉडल टाउन जैसे इलाकों में ऐसी स्थिति होने की बात रिपोर्ट में कही गई है।
पार्किंग से लेकर छत तक बना दिए अतिरिक्त कमरे
अवैध पीजी में जगह बढ़ाने के लिए पार्किंग की जगह पर किचन बनाने, बालकनी को कमरे में बदलने और छत पर टीन शेड लगाकर अतिरिक्त कमरे बनाने के आरोप हैं।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि ऐसे कई पीजी में फायर एनओसी और बिल्डिंग स्ट्रक्चर सर्टिफिकेट तक नहीं होते। ऐसे में किसी आपात स्थिति में यहां रहने वाले छात्रों और अन्य लोगों की सुरक्षा बड़ा सवाल बन जाती है।
घरेलू बिजली कनेक्शन, लेकिन व्यावसायिक इस्तेमाल
पीजी संचालकों पर बिजली के नियमों की अनदेखी के भी आरोप लगाए गए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, कुछ जगहों पर घरेलू कनेक्शन के जरिए एसी, गीजर और इंडक्शन जैसे उपकरण चलाए जा रहे हैं, जबकि वास्तविक बिजली लोड काफी ज्यादा रहता है।
नियमों के मुताबिक व्यावसायिक गतिविधि के लिए बिजली और पानी के मीटर भी व्यावसायिक श्रेणी के होने चाहिए, लेकिन कई जगह निजी श्रेणी के मीटर इस्तेमाल किए जाने का दावा किया गया है।
किराए की रकम छिपाने का आरोप
रिपोर्ट में पीजी कारोबार में किराए की रकम को अलग-अलग मदों में दिखाकर आय छिपाने के तरीके का भी जिक्र है। कथित तौर पर कुछ संचालक रेंट एग्रीमेंट में कम किराया दिखाते हैं, जबकि खाने, एसी, वाई-फाई और दूसरी सुविधाओं के नाम पर अतिरिक्त रकम नकद लेते हैं।
कुछ मामलों में ऑनलाइन भुगतान व्यावसायिक खाते की जगह कर्मचारियों, रिश्तेदारों या केयरटेकर के खातों में लेने का भी दावा किया गया है। इससे वास्तविक आय का हिसाब पकड़ना मुश्किल हो जाता है।
GST और टैक्स को लेकर भी सवाल
रिपोर्ट के मुताबिक, पीजी संचालकों के एक बड़े हिस्से पर रिटर्न नहीं भरने और जीएसटी से बचने के आरोप हैं। यही वजह है कि करीब 20 हजार करोड़ रुपये के इस कारोबार को सरकार के लिए संभावित राजस्व नुकसान से जोड़कर देखा जा रहा है।
साथ ही रिपोर्ट में कहा गया है कि पीजी कारोबार के लिए फिलहाल कोई केंद्रीयकृत रजिस्ट्रेशन और नियमन व्यवस्था नहीं होने से निगरानी की समस्या बनी हुई है।
सत्य निकेतन हादसे के बाद बढ़ी चिंता
दिल्ली में हाल ही में सत्य निकेतन में पीजी इमारत के हादसे के बाद राजधानी में ऐसे आवासों की सुरक्षा को लेकर सवाल और गंभीर हो गए हैं। हादसे के बाद पीजी इमारतों का सर्वे भी शुरू किया गया है।
अब जरूरत इस बात की है कि पीजी संचालकों के लिए स्पष्ट नियम, अनिवार्य पंजीकरण, नियमित सुरक्षा जांच और फायर सेफ्टी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि छात्रों और कामकाजी युवाओं की सुरक्षा केवल किराए की रसीद तक सीमित न रह जाए।
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