
नई दिल्ली/लखनऊ: बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने जम्मू-कश्मीर को अब तक पूर्ण राज्य का दर्जा नहीं दिए जाने के मुद्दे पर गहरी चिंता व्यक्त की है। शुक्रवार को नई दिल्ली में हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर राज्य के बसपा संगठन के कामकाज की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक के दौरान उन्होंने यह बात कही। बैठक में बसपा सुप्रीमो ने दोनों राज्यों के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं को निर्देश दिया कि वे सर्वसमाज में पार्टी के जनाधार को मजबूत करने के लिए पूरी मुस्तैदी और तन, मन, धन से जुट जाएं। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि जमीनी स्तर पर काम करने के साथ-साथ चुनावी सफलताओं को भी पूरा महत्व देना समय की बड़ी मांग है।
समीक्षा बैठक के दौरान जम्मू-कश्मीर के सांगठनिक पदाधिकारियों ने जमीनी फीडबैक देते हुए मायावती को अवगत कराया कि वहां की जनता लंबे समय से पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल होने का इंतजार कर रही है। केंद्र सरकार के इस वादे के लंबित रहने से अब स्थानीय लोगों में निराशा बढ़ रही है, क्योंकि बेहतर सुरक्षा व्यवस्था के दावों के बावजूद इस नीति के कारण क्षेत्र में अपेक्षित मानवीय और क्षेत्रीय विकास गति नहीं पकड़ पा रहा है। अधिकारियों ने बताया कि उचित लोकतांत्रिक और प्रशासनिक व्यवस्था के अभाव में आम लोगों का जीवन लगातार आशंकाओं के साये में घिरा हुआ है। इस पर बसपा प्रमुख ने कहा कि देश के अन्य राज्यों की तरह हिमाचल और जम्मू-कश्मीर में भी सर्वसमाज के लोगों, विशेषकर ‘बहुजन समाज’ (दलित, पिछड़े और अल्पसंख्यक) को गरीबी, बेरोजगारी, अशिक्षा और आर्थिक पिछड़ेपन का बोझिल जीवन जीने को मजबूर होना पड़ रहा है।
मायावती ने कार्यकर्ताओं का आह्वान करते हुए कहा कि दोनों राज्यों के शोषितों और वंचितों को उत्तर प्रदेश की तर्ज पर अपने भीतर ‘शोषित से शासक वर्ग’ बनने की ललक और राजनीतिक चेतना पैदा करनी होगी। उन्होंने आगाह किया कि विरोधी जातिवादी और सांप्रदायिक पार्टियों के साम, दाम, दंड, भेद जैसे हथकंडों और राजनीतिक षडयंत्रों को ध्वस्त करके ही बहुजन समाज आगे बढ़ सकता है। वहीं, हिमाचल प्रदेश में हाल ही में संपन्न हुए स्थानीय निकाय चुनावों के बाद पैदा हुए राजनीतिक हालातों पर चर्चा करते हुए मायावती ने कहा कि वहां की जनता में कांग्रेस और भाजपा दोनों ही पारंपरिक दलों के प्रति भारी नाराजगी और असंतोष देखने को मिला है। ऐसे में हिमाचल प्रदेश में बसपा को एक मजबूत और बेहतर तीसरे विकल्प के रूप में स्थापित करने की सख्त जरूरत है ताकि जनता को इन दोनों दलों के कुशासन से मुक्ति मिल सके।
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