इंजीनियर इन चीफ का आलीशान सरकारी बंगला चर्चा में, अफसरों के घरों को भी छोड़ा पीछे

अफसरों की सबसे प्रतिष्ठित सरकारी कॉलोनी में इन दिनों एक वरिष्ठ इंजीनियर अधिकारी का बंगला असाधारण भव्यता के कारण चर्चा का केंद्र बना हुआ है। बताया जा रहा है कि यह आवास किसी मंत्री या शीर्ष प्रशासनिक अधिकारी के निवास से कम नहीं दिखता। बाहरी ढांचे से लेकर आंतरिक सजावट तक हर हिस्से में विशेष डिजाइन और प्रीमियम सामग्री का उपयोग दिखाई देता है, जिसने इसे आसपास के अन्य सरकारी बंगलों से अलग पहचान दी है।

सूत्रों के अनुसार, बंगले के निर्माण और साज-सज्जा में कई उन्नत डिजाइन तत्व जोड़े गए हैं—जैसे विशेष पत्थर और लकड़ी का काम, आधुनिक लाइटिंग, आकर्षक लैंडस्केपिंग और सजावटी संरचनाएं। कॉलोनी के निवासियों का कहना है कि घर की भव्यता देखकर ही उसके संभावित खर्च का अनुमान लगाया जा सकता है। अनौपचारिक चर्चाओं में यह भी कहा जा रहा है कि यह बंगला कई वरिष्ठ अधिकारियों के आवासों से भी अधिक सुसज्जित प्रतीत होता है।

इस मामले ने सरकारी आवासों के उपयोग और साज-सज्जा की सीमा पर बहस छेड़ दी है। परंपरागत रूप से सरकारी बंगलों में आवश्यक और मर्यादित स्तर की सजावट ही स्वीकार्य मानी जाती रही है, ताकि सार्वजनिक संसाधनों के उपयोग में संयम बना रहे। लेकिन यहां दिखाई दे रही भव्यता ने यह सवाल खड़ा किया है कि क्या निर्धारित मानकों से आगे जाकर निजी पसंद और सुविधा को प्राथमिकता दी गई है।

 

हालांकि आधिकारिक तौर पर किसी नियम उल्लंघन या अतिरिक्त खर्च की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन नौकरशाही हलकों में यह मामला “सरकारी बनाम निजी” सीमा रेखा के उदाहरण के रूप में देखा जा रहा है। इंजीनियर इन चीफ के इस चर्चित बंगले ने अफसरशाही में एक नई बहस को जन्म दिया है—क्या सरकारी आवास केवल सुविधा का स्थान है या व्यक्तिगत प्रतिष्ठा का प्रदर्शन भी? 

  • gaurav singh rajput

    gaurav singh rajput

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