फिर याद आए पूर्व कलेक्टर शीलेंद्र सिंह, छिंदवाड़ा में आज भी कायम है लोकप्रियता

छिंदवाड़ा। जिले के प्रशासनिक इतिहास में कुछ अधिकारी ऐसे होते हैं जो अपने कार्यकाल के वर्षों बाद भी जनता की स्मृतियों में जीवित रहते हैं। पूर्व कलेक्टर शीलेंद्र सिंह का नाम भी ऐसे ही अधिकारियों में शामिल है, जिन्हें आज भी जिले के अनेक नागरिक सम्मान और आत्मीयता के साथ याद करते हैं। आम लोगों का मानना है कि उनके कार्यकाल के दौरान प्रशासन अधिक सक्रिय, जवाबदेह और जनसरोकारों के प्रति संवेदनशील दिखाई देता था। यही कारण है कि जब भी जिले के विकास और प्रशासनिक व्यवस्था की चर्चा होती है, तो शीलेंद्र सिंह का नाम स्वतः सामने आ जाता है।

अपने कार्यकाल के दौरान शीलेंद्र सिंह ने विकास कार्यों को गति देने के साथ-साथ प्रशासनिक तंत्र को मजबूत बनाने का प्रयास किया। कृषि, रोजगार, आदिवासी विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य, खेल और पर्यटन जैसे क्षेत्रों में उनकी सक्रिय भूमिका चर्चा का विषय रही। वे नियमित रूप से जनता से संवाद स्थापित करते थे और जनसमस्याओं के त्वरित निराकरण को प्राथमिकता देते थे। उनकी कार्यशैली का सबसे मजबूत पक्ष आम नागरिकों तक सीधी पहुंच और प्रशासन को जनता के प्रति जवाबदेह बनाना माना जाता है। इससे लोगों का प्रशासन पर विश्वास बढ़ा और शासन-प्रशासन के प्रति सकारात्मक माहौल बना।

पर्यटन क्षेत्र में भी उनके प्रयासों को उल्लेखनीय माना जाता है। विशेष रूप से तामिया और पातालकोट जैसे प्राकृतिक और सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण क्षेत्रों को नई पहचान दिलाने की दिशा में कई पहलें की गईं। होम-स्टे जैसी योजनाओं को बढ़ावा देकर स्थानीय युवाओं और ग्रामीण परिवारों के लिए रोजगार के अवसर सृजित करने का प्रयास किया गया। वहीं खेलों के प्रति उनकी विशेष रुचि के चलते जिले में खेल गतिविधियों को प्रोत्साहन मिला और युवा प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने के लिए कई योजनाओं पर काम किया गया। इन पहलों का प्रभाव आज भी कई क्षेत्रों में देखने को मिलता है।

हालांकि उनका कार्यकाल पूरी तरह विवादों से अछूता नहीं रहा। आदिवासी भूमि और कुछ प्रशासनिक निर्णयों को लेकर समय-समय पर आरोप-प्रत्यारोप भी लगे। लेकिन उनके समर्थकों का कहना है कि अधिकांश फैसले नियमों और कानूनी प्रक्रियाओं के अनुरूप लिए गए तथा उन्होंने निष्पक्ष प्रशासन को प्राथमिकता दी। कुछ लोगों का यह भी मानना है कि तत्कालीन राजनीतिक परिस्थितियों के कारण उन्हें अनावश्यक विवादों में घेरने की कोशिश की गई। इसके बावजूद उन्होंने अपने दायित्वों का निर्वहन पूरी प्रतिबद्धता के साथ जारी रखा।

आज भी छिंदवाड़ा के अनेक नागरिक यह महसूस करते हैं कि शीलेंद्र सिंह के कार्यकाल में विकास कार्यों की गति तेज थी और प्रशासन आम जनता की अपेक्षाओं के अधिक निकट दिखाई देता था। भले ही इस विषय पर अलग-अलग मत हो सकते हैं, लेकिन यह निर्विवाद है कि उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान ऐसी पहचान बनाई, जो वर्षों बाद भी लोगों की स्मृतियों में बनी हुई है। यही वजह है कि उनका नाम आज भी जिले में सुशासन, विकास और प्रशासनिक सक्रियता के प्रतीक के रूप में लिया जाता है।

  • former-collector-shailendra-singh-still-remembered-by-chhindwara-residents
  • gaurav singh rajput

    gaurav singh rajput

    Related Posts

    गधे की फोटो से नर्सिंग रजिस्ट्रेशन? NSUI के दावे ने MPNRC की ऑनलाइन व्यवस्था पर खड़े किए गंभीर सवाल

    भोपाल। मध्यप्रदेश में नर्सिंग शिक्षा और नर्सिंग कॉलेजों की…

    आरकेडीएफ यूनिवर्सिटी पर ₹2 करोड़ से ज्यादा टैक्स बकाया का दावा, नगर निगम की कार्रवाई पर सवाल

    राजधानी भोपाल की आरकेडीएफ यूनिवर्सिटी एक बार फिर विवादों…

    You Missed

    MP Bus Fare: सुगम परिवहन सेवा के बाद भी महंगा सफर, 1 KM के ₹2 किराये पर उठे सवाल

    MP Bus Fare: सुगम परिवहन सेवा के बाद भी महंगा सफर, 1 KM के ₹2 किराये पर उठे सवाल

    कांग्रेस पर भाजपा का बड़ा हमला, बिहारीलाल आर्य बोले- संवैधानिक संस्थाओं पर आरोप हताशा का प्रतीक

    कांग्रेस पर भाजपा का बड़ा हमला, बिहारीलाल आर्य बोले- संवैधानिक संस्थाओं पर आरोप हताशा का प्रतीक

    उज्जैन में शाही मस्जिद के हिस्से को हटाने पर बवाल, पथराव के बाद पुलिस ने छोड़े आंसू गैस के गोले

    उज्जैन में शाही मस्जिद के हिस्से को हटाने पर बवाल, पथराव के बाद पुलिस ने छोड़े आंसू गैस के गोले

    पीएचसी सालोन-बी में सीएमएचओ का औचक निरीक्षण, लापरवाही पर सुपरवाइजर और डीईओ को नोटिस

    पीएचसी सालोन-बी में सीएमएचओ का औचक निरीक्षण, लापरवाही पर सुपरवाइजर और डीईओ को नोटिस

    समूह सचिव हटाने पर उठे सवाल, आजीविका मिशन के अधिकारियों पर मिलीभगत के आरोप

    समूह सचिव हटाने पर उठे सवाल, आजीविका मिशन के अधिकारियों पर मिलीभगत के आरोप