
इस खूनी संघर्ष और लाठी-डंडों के हमले में रामबाबू पाल, गीता, रामवती, संकेत और प्राजंलि गंभीर रूप से घायल हो गए हैं, जिन्हें स्थानीय लोगों की मदद से अस्पताल पहुंचाया गया है। पीड़ित परिवार ने गाँव के ही रसूखदार मनोज, विनोद, भारत और उत्कर्ष समेत कई अन्य लोगों पर योजनाबद्ध तरीके से जानलेवा हमला करने का सीधा आरोप लगाया है। चश्मदीदों के मुताबिक, इस पूरी मारपीट और गुंडागर्दी में आरोपियों के घर की महिलाएं भी बढ़-चढ़कर शामिल थीं, जिन्होंने लाठियां भांजने में कोई कसर नहीं छोड़ी।
पीड़ित परिवार ने पुलिस प्रशासन पर भी गंभीर आरोप लगाते हुए बताया कि साल 2022 में भी इन दबंगों ने उन पर कुल्हाड़ी और डंडों से जानलेवा हमला किया था। उस वक्त पुलिस द्वारा कोई ठोस कानूनी कार्रवाई न किए जाने के कारण ही इन अपराधियों के हौसले सातवें आसमान पर हैं और वे लगातार वारदात को अंजाम दे रहे हैं। घटना के बाद से पूरा पीड़ित परिवार सहमा हुआ है और उन्होंने पुलिस के आला अधिकारियों से आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी, सख्त कार्रवाई और जान-माल की सुरक्षा की गुहार लगाई है। सदर कोतवाली पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए शिकायत दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
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