
होर्मुज़ स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है। वैश्विक समुद्री तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा इसी संकरे जलमार्ग से गुजरता है। यदि यह पूरी तरह बंद हो जाए, तो दुनिया के पास कुछ वैकल्पिक रास्ते जरूर हैं, लेकिन वे होर्मुज़ की पूरी क्षमता की भरपाई नहीं कर सकते।
किन विकल्पों का इस्तेमाल किया जा सकता है?
- सऊदी अरब की ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन के जरिए तेल को यनबू (लाल सागर) तक पहुंचाया जा सकता है।
- यूएई की अबू धाबी क्रूड ऑयल पाइपलाइन से फुजैराह बंदरगाह तक तेल भेजा जा सकता है, जहां से जहाज सीधे अरब सागर में निकलते हैं।
- इराक की किर्कुक-सेहान पाइपलाइन के जरिए भूमध्यसागर तक तेल पहुंचाया जा सकता है।
फिर भी पूरी भरपाई क्यों नहीं हो सकती?
विशेषज्ञों के अनुसार, इन सभी वैकल्पिक पाइपलाइनों की संयुक्त क्षमता होर्मुज़ से गुजरने वाले तेल की तुलना में काफी कम है। इसलिए यदि जलडमरूमध्य लंबे समय तक बंद रहता है, तो वैश्विक तेल आपूर्ति प्रभावित हो सकती है और कीमतों में तेज बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।
भारत पर क्या असर पड़ेगा?
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से आयात करता है। ऐसे में होर्मुज़ में व्यवधान आने पर कच्चे तेल और एलएनजी की आपूर्ति, परिवहन लागत और ईंधन की कीमतों पर असर पड़ सकता है। हालांकि भारत जैसे देश वैकल्पिक स्रोतों, रणनीतिक भंडार और अन्य समुद्री मार्गों का भी उपयोग करने की कोशिश करते हैं।
- hormuz-strait-closure-alternative-routes-global-oil-supply-explained









