
मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच ईरान ने दुनिया की सबसे अहम समुद्री मार्गों में से एक, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर बड़ा बयान दिया है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने घोषणा की है कि सीजफायर की अवधि तक यह जलडमरूमध्य पूरी तरह से व्यापारिक जहाजों के लिए खुला रहेगा। यह फैसला ऐसे समय आया है जब हाल में हुए संघर्ष और हमलों के चलते इस मार्ग से गुजरने वाली वैश्विक तेल सप्लाई बुरी तरह प्रभावित हुई थी।
सीजफायर से जुड़ा है फैसला
ईरान ने स्पष्ट किया है कि यह निर्णय लेबनान में लागू सीजफायर के तहत लिया गया है। विदेश मंत्री अराघची ने सोशल मीडिया पर कहा कि सभी कमर्शियल जहाजों को पहले से तय किए गए समन्वित रूट के जरिए गुजरने की अनुमति होगी। मतलब यह है कि यह पूरी तरह “खुला” होने के बावजूद एक नियंत्रित व्यवस्था के तहत संचालित होगा।
जहाजों के लिए शर्तें भी लागू
हालांकि ईरान के इस ऐलान के साथ कुछ शर्तें भी जुड़ी हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, जहाजों को ईरान द्वारा निर्धारित रूट का पालन करना होगा और सुरक्षा एजेंसियों से अनुमति लेनी पड़ सकती है। इसके अलावा, सैन्य जहाजों के लिए यह रास्ता अभी भी प्रतिबंधित रखा गया है, जिससे साफ है कि पूरी तरह सामान्य स्थिति अभी नहीं बनी है।
अमेरिका की नाकेबंदी जारी
ईरान के इस फैसले के बावजूद अमेरिका ने अपनी नौसैनिक नाकेबंदी खत्म नहीं की है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि जब तक ईरान के साथ समझौता पूरा नहीं होता, तब तक नाकेबंदी जारी रहेगी। यानी समुद्री रास्ता खुलने के बावजूद क्षेत्र में सैन्य तनाव अभी भी बना हुआ है।
वैश्विक बाजार पर असर
होर्मुज जलडमरूमध्य के खुलने की खबर का असर तुरंत अंतरराष्ट्रीय बाजार पर दिखा। तेल की कीमतों में करीब 10% तक गिरावट दर्ज की गई, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था को कुछ राहत मिली। यह जलमार्ग दुनिया के करीब 20% तेल परिवहन के लिए बेहद अहम माना जाता है, इसलिए इसकी स्थिति का सीधा असर वैश्विक बाजार पर पड़ता है।
पहले बंद होने से मचा था संकट
अमेरिका-ईरान संघर्ष के दौरान इस स्ट्रेट को लगभग बंद कर दिया गया था, जिससे तेल आपूर्ति बाधित हुई और कीमतें तेजी से बढ़ गई थीं। अब आंशिक रूप से खुलने से राहत जरूर मिली है, लेकिन हालात अभी भी पूरी तरह स्थिर नहीं हैं।विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक अमेरिका और ईरान के बीच स्थायी समझौता नहीं होता, तब तक इस मार्ग की स्थिति अनिश्चित बनी रहेगी। सीजफायर खत्म होते ही हालात फिर बदल सकते हैं।
भारत आ रहे 41 जहाज
होर्मुज खुलते ही भारत आने वाले 41 जहाज आगे बढ़ने को तैयार हैं। इन जहाजों में कच्चा तेल, एलपीजी, एलएनजी और खाद जैसी जरूरी चीजें भरी हुई हैं। इनमें 15 भारतीय और 26 विदेशी जहाज शामिल हैं। एक दर्जन से ज्यादा जहाज सिर्फ फर्टिलाइजर लेकर आ रहे हैं, जो खरीफ सीजन से पहले बेहद अहम हैं। भारतीय जहाजों की बात करें तो 10 में क्रूड ऑयल, 4 में एलपीजी और 3 में एलएनजी है। यानी ऊर्जा से लेकर खेती तक, हर सेक्टर को राहत मिलने वाली है।
रास्ता छोटा, कारोबार बड़ा
निर्यातकों के संगठन फियो के डायरेक्टर जनरल अजय सहाय का कहना है कि अब सिर्फ पश्चिम एशिया ही नहीं, बल्कि यूरोप तक सामान भेजना भी आसान हो जाएगा। यानी रास्ता छोटा तो खर्च कम और मुनाफा ज्यादा।
ईरान का यह फैसला वैश्विक व्यापार और तेल सप्लाई के लिए राहत भरा जरूर है, लेकिन शर्तों और अमेरिकी नाकेबंदी के चलते क्षेत्र में तनाव अभी भी बरकरार है। आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि यह राहत अस्थायी है या स्थायी समाधान की ओर बढ़ रही है।
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