
इंदौर के डेली कॉलेज परिसर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के समापन अवसर पर ‘चरैवेति एकत्रीकरण’ आयोजित किया गया। कार्यक्रम में मालवा प्रांत के विभिन्न क्षेत्रों से स्वयंसेवक शामिल हुए। संघ के सह सरकार्यवाह अतुल लिमये ने संबोधित करते हुए सामाजिक बदलाव के लिए व्यापक भागीदारी, संवाद और समन्वय की जरूरत पर जोर दिया।
अतुल लिमये ने सामाजिक भागीदारी को बताया जरूरी
अतुल लिमये ने कहा कि समाज में व्यापक बदलाव केवल किसी एक संगठन के प्रयास से संभव नहीं है। इसके लिए समाज के अलग-अलग वर्गों और संस्थाओं की भागीदारी जरूरी है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जिस तरह जगन्नाथ का रथ सभी के सहयोग से आगे बढ़ता है, उसी तरह सामाजिक परिवर्तन के लिए भी सामूहिक प्रयास की आवश्यकता है। उन्होंने सामाजिक संस्थाओं के बीच संवाद और समन्वय बढ़ाने की बात कही।
100 साल की यात्रा को बताया स्वयंसेवकों के परिश्रम का परिणाम
लिमये ने संघ की 100 वर्षों की यात्रा का उल्लेख करते हुए इसे स्वयंसेवकों के परिश्रम और समर्पण से जुड़ी यात्रा बताया। उन्होंने शाखा पद्धति के जरिए व्यक्ति निर्माण और सामाजिक कार्यों में स्वयंसेवकों की भूमिका का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि शताब्दी वर्ष पूरा होने के बाद भी संगठन को समाज के विभिन्न वर्गों तक पहुंच बढ़ाने और काम की गुणवत्ता पर ध्यान देने की जरूरत है।
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पंच परिवर्तन के जरिए व्यवहार में बदलाव पर जोर
कार्यक्रम में ‘पंच परिवर्तन’ की अवधारणा पर भी जोर दिया गया। लिमये ने कहा कि केवल विचारों का प्रसार पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें व्यवहार में उतारना भी जरूरी है। उन्होंने सामाजिक जीवन में समानता, आत्मीयता और संवाद की जरूरत बताई। उनके अनुसार, समाज में किसी भी वर्ग के साथ विषमता का व्यवहार नहीं होना चाहिए।
नवंबर में इंदौर में होगी संघ की बड़ी बैठक
चरैवेति एकत्रीकरण के बाद 2 से 4 नवंबर 2026 तक इंदौर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल की बैठक प्रस्तावित है। इसमें संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत, सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले समेत देशभर के पदाधिकारी शामिल होंगे। बैठक में शताब्दी वर्ष की गतिविधियों की समीक्षा के साथ सामाजिक और राष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा होने की जानकारी दी गई है।
इंदौर का चरैवेति एकत्रीकरण संघ के शताब्दी वर्ष के कार्यक्रमों के समापन का प्रमुख आयोजन रहा। कार्यक्रम में संगठनात्मक विस्तार के साथ सामाजिक भागीदारी, समरसता और व्यवहार में बदलाव पर जोर दिया गया।








