
मध्य प्रदेश के इंदौर स्थित श्री गोविंदराम सेकसरिया प्रौद्योगिकी एवं विज्ञान संस्थान (एसजीएसआईटीएस) ने छात्रों के लिए नई पहल करते हुए बीटेक सिविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई हिंदी माध्यम में शुरू करने का फैसला लिया है। यह कदम राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) के तहत तकनीकी शिक्षा को मातृभाषा में उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
चार साल की बाध्यता खत्म
संस्थान ने हिंदी माध्यम में प्रवेश लेने वाले छात्रों के लिए पहले लागू चार वर्ष की अनिवार्य पढ़ाई की शर्त भी समाप्त कर दी है। अब छात्र आवश्यकता और सुविधा के अनुसार अध्ययन का माध्यम चुन सकेंगे। इससे अधिक विद्यार्थियों के इस पाठ्यक्रम से जुड़ने की संभावना है।
मातृभाषा में तकनीकी शिक्षा को मिलेगा बढ़ावा
संस्थान का मानना है कि हिंदी माध्यम में इंजीनियरिंग की पढ़ाई से ग्रामीण और हिंदी भाषी पृष्ठभूमि के विद्यार्थियों को तकनीकी विषयों को बेहतर ढंग से समझने में मदद मिलेगी। यह पहल तकनीकी शिक्षा को अधिक समावेशी और सुलभ बनाने की दिशा में अहम कदम मानी जा रही है।
छात्रों को मिलेगा नया विकल्प
इस फैसले से उन छात्रों को लाभ मिलेगा जो अपनी मातृभाषा में इंजीनियरिंग की पढ़ाई करना चाहते हैं। संस्थान को उम्मीद है कि इस पहल से तकनीकी शिक्षा में छात्रों की भागीदारी और सीखने की गुणवत्ता दोनों में सुधार होगा।
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