ईरान को 6 अरब डॉलर के फ्रीज फंड से जरूरी सामान खरीदने की मंजूरी, अमेरिका पर समझौता तोड़ने का आरोप

ईरान को लंबे समय से फ्रीज पड़े 6 अरब डॉलर (करीब 50 हजार करोड़ रुपये) के फंड का उपयोग अब मानवीय जरूरतों से जुड़े सामान खरीदने के लिए करने की अनुमति मिल गई है। इस राशि का इस्तेमाल केवल दवाइयों, चिकित्सा उपकरणों, खाद्यान्न और अन्य आवश्यक वस्तुओं की खरीद के लिए किया जाएगा। इसके साथ ही पूरी प्रक्रिया की निगरानी के लिए एक विशेष समिति बनाई जाएगी, ताकि धन का उपयोग तय नियमों और समझौते की शर्तों के अनुसार ही हो।

ईरान ने इस फैसले के बीच अमेरिका पर समझौता तोड़ने का आरोप लगाया है। तेहरान का कहना है कि वॉशिंगटन ने पहले हुए समझौते का पूरी तरह पालन नहीं किया और कई मौकों पर प्रतिबंधों तथा बैंकिंग नियमों का हवाला देकर फंड तक पहुंच में बाधाएं पैदा कीं। ईरानी अधिकारियों का दावा है कि अमेरिका ने अपने वादों से पीछे हटते हुए समझौते की भावना के विपरीत कदम उठाए।

इस फंड का इस्तेमाल केवल मानवीय जरूरतों से जुड़ी वस्तुओं की खरीद के लिए किया जा सकेगा। इसमें दवाइयां, मेडिकल उपकरण, खाद्यान्न, कृषि उत्पाद और अन्य आवश्यक नागरिक उपयोग की सामग्री शामिल हैं। किसी भी सैन्य गतिविधि, हथियार खरीद या प्रतिबंधित कार्यों के लिए इस राशि का उपयोग पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। भुगतान और लेनदेन भी तय बैंकिंग चैनलों के माध्यम से ही किए जाएंगे ताकि पारदर्शिता बनी रहे।

समझौते के तहत गठित निगरानी समिति यह सुनिश्चित करेगी कि फंड का इस्तेमाल केवल स्वीकृत उद्देश्यों के लिए ही हो और किसी भी प्रकार से अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों या समझौते का उल्लंघन न हो। समिति लेनदेन की लगातार समीक्षा करेगी और जरूरत पड़ने पर संबंधित पक्षों से जवाब भी मांग सकेगी।

हालांकि मानवीय जरूरतों के लिए फंड के उपयोग की अनुमति को सकारात्मक कदम माना जा रहा है, लेकिन अमेरिका और ईरान के बीच अविश्वास अभी भी कायम है। दोनों देशों के बीच परमाणु कार्यक्रम, आर्थिक प्रतिबंध और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे कई बड़े मुद्दों पर मतभेद बने हुए हैं। जानकारों का मानना है कि यदि इस व्यवस्था का सफलतापूर्वक पालन होता है तो भविष्य में दोनों देशों के बीच कुछ अन्य मानवीय और कूटनीतिक मुद्दों पर भी बातचीत की संभावनाएं बढ़ सकती हैं।

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