
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की जबलपुर खंडपीठ ने भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) अधिकारी संतोष वर्मा के खिलाफ दायर याचिका को खारिज कर दिया है। याचिका में कोर्ट से मांग की गई थी कि संबंधित अधिकारी के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के तहत कार्रवाई के निर्देश दिए जाएं। मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि इस प्रकार के मामलों में अदालत सीधे तौर पर किसी व्यक्ति पर एनएसए लगाने का आदेश जारी नहीं कर सकती। कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता द्वारा मांगी गई राहतें न्यायिक अधिकार क्षेत्र के अनुरूप नहीं हैं, इसलिए उन्हें स्वीकार नहीं किया जा सकता।
सुनवाई के दौरान अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम के तहत कार्रवाई करने का अधिकार संबंधित कार्यपालिका और सक्षम प्रशासनिक प्राधिकरण के पास होता है। न्यायालय केवल कानून के दायरे में निर्णय ले सकता है और किसी व्यक्ति के विरुद्ध सीधे एनएसए लगाने का निर्देश देना अदालत के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता। इसी आधार पर याचिका में मांगी गई प्रमुख राहतों को अस्वीकार कर दिया गया।
हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद आईएएस अधिकारी संतोष वर्मा को तत्काल राहत मिली है। हालांकि अदालत ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया कि यदि किसी मामले में कानून के अनुसार कोई वैधानिक कार्रवाई आवश्यक हो तो संबंधित सक्षम प्राधिकरण अपने अधिकारों का उपयोग करने के लिए स्वतंत्र है। न्यायालय ने केवल यह कहा कि याचिका में जिस प्रकार की राहत की मांग की गई थी, उसे न्यायिक प्रक्रिया के माध्यम से मंजूर नहीं किया जा सकता।
इस फैसले को प्रशासनिक और कानूनी दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विधि विशेषज्ञों का कहना है कि यह आदेश न्यायपालिका और कार्यपालिका के अधिकार क्षेत्र की सीमाओं को स्पष्ट करता है। अदालत ने अपने निर्णय में यह संदेश भी दिया कि किसी भी कठोर कानूनी कार्रवाई के लिए निर्धारित वैधानिक प्रक्रिया का पालन आवश्यक है और न्यायालय संविधान तथा कानून द्वारा निर्धारित सीमाओं के भीतर ही आदेश पारित कर सकता है।
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