
एक जिले में युवा आईपीएस अधिकारी की सख्त कार्यशैली ने स्थानीय राजनीति में नया समीकरण खड़ा कर दिया है। दावा किया जा रहा है कि लंबे समय से एक-दूसरे के राजनीतिक विरोधी रहे कुछ जनप्रतिनिधि अब एसपी को हटाने के मुद्दे पर एकजुट हो गए हैं। चर्चा है कि अधिकारी की सख्ती से नाराजगी के चलते यह लामबंदी शुरू हुई है।
पुराने घोटाले की जांच बनी परेशानी?
सूत्रों के मुताबिक, एसपी ने एक पुराने घोटाले की विस्तृत जांच शुरू कराई है। जांच आगे बढ़ने के साथ कई महत्वपूर्ण कड़ियां सामने आने की संभावना जताई जा रही है। इसी के बाद कथित तौर पर कुछ प्रभावशाली लोगों में बेचैनी बढ़ी है।
हालांकि, जांच में किन लोगों के नाम सामने आए हैं या किन जनप्रतिनिधियों की भूमिका पर सवाल हैं, इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में पूरे मामले में जांच के निष्कर्ष का इंतजार है।
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राजधानी में बढ़ी सक्रियता
चर्चा है कि एसपी को हटाने की मांग को लेकर कुछ जनप्रतिनिधियों ने राजधानी का रुख किया है। बताया जा रहा है कि इस सिलसिले में मुख्यमंत्री से मुलाकात भी की गई। हालांकि, मुलाकात के बाद एसपी को हटाने को लेकर कोई ठोस आश्वासन मिलने की बात सामने नहीं आई है।
सख्त कार्यशैली से बना नया राजनीतिक समीकरण
इस पूरे घटनाक्रम की सबसे दिलचस्प बात यह बताई जा रही है कि जिन जनप्रतिनिधियों के बीच राजनीतिक मतभेद लंबे समय से चर्चा में रहे हैं, वे अब एक ही मुद्दे पर साथ दिखाई दे रहे हैं। इसे एसपी की सख्त कार्यशैली और पुराने मामलों की जांच से जोड़कर देखा जा रहा है।
फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि एसपी के खिलाफ लगाए जा रहे आरोपों या उन्हें हटाने की मांग पर सरकार क्या निर्णय लेगी। वहीं, पुराने घोटाले की जांच आगे बढ़ने के साथ इस राजनीतिक घटनाक्रम पर भी सभी की नजर बनी हुई है।
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