छोटे राज्यों से ही विकास संभव, प्रधानमंत्री मोदी से बुन्देलखण्ड राज्य के गठन की मांग

नई दिल्ली/राजकुमार शर्मा की रिपोर्ट: छोटे राज्यों के गठन को विकास, प्रशासनिक सुगमता और क्षेत्रीय संतुलन के लिए आवश्यक बताते हुए फेडरेशन फॉर न्यू स्टेट्स द्वारा रविवार को नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर एक दिवसीय धरना आयोजित किया गया। धरने में देश के विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे प्रतिनिधियों ने अपने-अपने क्षेत्रों के लिए पृथक राज्य के गठन की मांग उठाई।

धरने को संबोधित करते हुए बुन्देलखण्ड राष्ट्र समिति के केंद्रीय अध्यक्ष प्रवीण पांडेय ने कहा कि बुन्देलखण्ड लंबे समय से जल संकट, बेरोजगारी, पलायन, कृषि संकट और पिछड़ेपन जैसी समस्याओं से जूझ रहा है। उन्होंने कहा कि बड़े राज्य का हिस्सा होने के कारण बुन्देलखण्ड की समस्याओं पर अपेक्षित ध्यान नहीं दिया जा रहा है।

उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बुन्देलखण्ड की लंबे समय से चली आ रही पृथक राज्य की मांग को स्वीकार करने की अपील की। प्रवीण पांडेय ने कहा कि अलग राज्य बनने से प्रशासन जनता के और करीब पहुंचेगा, स्थानीय संसाधनों का बेहतर उपयोग हो सकेगा तथा क्षेत्र के विकास के लिए अलग बजट और योजनाएं तैयार की जा सकेंगी।

फेडरेशन फॉर न्यू स्टेट्स के महामंत्री कमलेश झा ने मिथिला प्रदेश की मांग उठाते हुए कहा कि मिथिला की अपनी विशिष्ट भाषा, संस्कृति और ऐतिहासिक पहचान है। क्षेत्र के समग्र विकास के लिए पृथक मिथिला प्रदेश का गठन आवश्यक है। पंकज पटेल ने आदिवासी प्रदेश की आवश्यकता पर विचार रखते हुए कहा कि आदिवासी क्षेत्रों की विशिष्ट समस्याओं और उपलब्ध संसाधनों को ध्यान में रखते हुए अलग प्रशासनिक व्यवस्था विकसित की जानी चाहिए, ताकि वहां के लोगों को विकास की मुख्यधारा से प्रभावी रूप से जोड़ा जा सके।

वहीं पश्चिमी क्षेत्र से आए सुधीर चौधरी ने पश्चिम प्रदेश के गठन की मांग उठाई। उन्होंने कहा कि पश्चिमी क्षेत्र की आर्थिक क्षमता और बड़ी आबादी को देखते हुए अलग राज्य का गठन होने से विकास की गति को और तेज किया जा सकता है। धरने में वक्ताओं ने कहा कि देश में छोटे राज्यों के अनुभव बताते हैं कि सीमित भौगोलिक क्षेत्र में प्रशासनिक पहुंच, योजनाओं की निगरानी और स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप विकास कार्यों को अधिक प्रभावी ढंग से संचालित किया जा सकता है।

कार्यक्रम में विभिन्न क्षेत्रों से आए प्रतिनिधियों ने केंद्र सरकार से नए राज्यों के गठन की मांग पर गंभीरता से विचार करने का आह्वान किया। वक्ताओं ने कहा कि क्षेत्रीय आकांक्षाओं का लोकतांत्रिक तरीके से सम्मान करते हुए छोटे राज्यों के गठन की दिशा में सकारात्मक पहल की जानी चाहिए।

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    Rashel Kachwah Rajput

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