
दतिया/राजकुमार शर्मा की रिपोर्ट: शासकीय गोविंद महाविद्यालय, सेवढ़ा, जिला दतिया में विद्यार्थियों को कानून, उनके अधिकारों, कर्तव्यों तथा वर्तमान समय में सामने आने वाली कानूनी चुनौतियों के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से एक विशेष संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का विषय “छात्र विमर्श : वर्तमान परिवेश में छात्रों की विधि में भूमिका” रखा गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. मनोज कुमार व्यास ने की।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उच्च न्यायालय खंडपीठ ग्वालियर के शासकीय अधिवक्ता डॉ. विक्रम पिप्पल उपस्थित रहे। विशिष्ट अतिथियों के रूप में उच्च न्यायालय ग्वालियर के शासकीय अधिवक्ता श्री भरत सिंह परमार, मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय खंडपीठ ग्वालियर के शासकीय अधिवक्ता श्री राजेंद्र सिंह गुर्जर, सेवढ़ा अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष श्री मुकेश सिंह यादव तथा अधिवक्ता श्री हरनारायण अहिरवार मौजूद रहे।
संगोष्ठी में मुख्य वक्ता डॉ. विक्रम पिप्पल ने विद्यार्थियों को वर्तमान समय में कानून की उपयोगिता और छात्रों की भूमिका के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने भविष्य में आने वाली कानूनी कठिनाइयों, संकट की परिस्थितियों में कानूनी सहायता प्राप्त करने के उपाय, घरेलू हिंसा, साइबर क्राइम, ऑनलाइन अपराध, व्यक्तिगत अधिकारों और कानूनी संरक्षण जैसे महत्वपूर्ण विषयों को सरल भाषा में समझाया। उन्होंने कहा कि प्रत्येक विद्यार्थी को अपने मूलभूत कानूनी अधिकारों और कर्तव्यों की जानकारी होना जरूरी है। कानून की जानकारी केवल न्यायालय या अधिवक्ताओं तक सीमित विषय नहीं है, बल्कि यह प्रत्येक नागरिक के सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन का महत्वपूर्ण आधार है।
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डॉ. पिप्पल के संबोधन को छात्र-छात्राओं और प्राध्यापकों ने ध्यानपूर्वक सुना। इस दौरान विद्यार्थियों ने अपनी जिज्ञासाओं और समस्याओं को भी अतिथियों के समक्ष रखा, जिनका वक्ताओं ने सरल भाषा में समाधान और मार्गदर्शन प्रदान किया। इसके बाद शासकीय अधिवक्ता श्री भरत सिंह परमार ने कानून के सामान्य नियम-कायदों और उनके व्यवहारिक जीवन में उपयोगिता पर अपने विचार रखे। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि कानून की बुनियादी जानकारी उन्हें अपने अधिकारों की रक्षा करने के साथ ही जिम्मेदार नागरिक बनने में भी मदद करेगी।
शासकीय अधिवक्ता श्री राजेंद्र सिंह गुर्जर ने भी कानून और नियमों की विद्यार्थियों के दैनिक जीवन में उपयोगिता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि कानूनी जागरूकता समस्याओं से बचने का प्रभावी माध्यम है। सेवढ़ा अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष श्री मुकेश सिंह यादव ने घरेलू हिंसा से जुड़े कानूनी प्रावधानों की जानकारी विद्यार्थियों को दी। उन्होंने घरेलू हिंसा के विभिन्न स्वरूपों, पीड़ितों के कानूनी अधिकारों और उपलब्ध कानूनी उपायों के बारे में बताया। अधिवक्ता श्री हरनारायण अहिरवार ने भी विद्यार्थियों को कानून के प्रति जागरूक करते हुए महत्वपूर्ण जानकारी साझा की।
कविता के माध्यम से प्राचार्य ने समझाए कानून और नियम-कायदे
कार्यक्रम का विशेष आकर्षण महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. मनोज कुमार व्यास का उद्बोधन रहा। उन्होंने कानून, नियम-कायदे, विद्यार्थियों के अधिकार एवं कर्तव्य तथा घरेलू हिंसा जैसे संवेदनशील विषयों को कविता के माध्यम से सरल, रोचक और प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। प्राचार्य द्वारा गंभीर कानूनी विषयों को काव्यात्मक शैली में समझाए जाने पर सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।
मुख्य अतिथि डॉ. विक्रम पिप्पल सहित सभी विशिष्ट अतिथियों और प्राध्यापकों ने प्राचार्य की इस रचनात्मक प्रस्तुति की सराहना की। अतिथियों ने कहा कि कठिन और गंभीर विषयों को कविता जैसे रचनात्मक माध्यम से विद्यार्थियों तक पहुंचाना प्रभावी और अनुकरणीय पहल है। उन्होंने डॉ. व्यास की इस शैली की प्रशंसा करते हुए भविष्य में अपने कार्यक्रमों में भी उन्हें आमंत्रित करने की इच्छा व्यक्त की।
अतिथियों ने महाविद्यालय में विद्यार्थियों के हित में किए जा रहे विभिन्न नवाचारों और रचनात्मक गतिविधियों की भी सराहना की। महाविद्यालय की सज्जा, पूर्व में आयोजित एड्स जागरूकता प्रदर्शनी और प्राचार्य द्वारा लिखी एवं प्रदर्शित की गई कविताओं को भी अतिथियों ने सराहा। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को शिक्षा के साथ सामाजिक, कानूनी और व्यावहारिक विषयों की जानकारी देना वर्तमान समय की आवश्यकता है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए प्राचार्य डॉ. मनोज कुमार व्यास ने कहा कि विद्यार्थियों को केवल पाठ्यक्रम तक सीमित ज्ञान देना पर्याप्त नहीं है। उन्हें वास्तविक जीवन की परिस्थितियों का सामना करने के लिए सामाजिक, कानूनी और व्यावहारिक जानकारी से भी परिचित कराना आवश्यक है। उन्होंने घोषणा की कि महाविद्यालय में विद्यार्थियों के हित में कानूनी जागरूकता, सामाजिक सरोकार और व्यक्तित्व विकास से जुड़े कार्यक्रम निरंतर आयोजित किए जाते रहेंगे।
कार्यक्रम का मंच संचालन डॉ. प्रतिभा सिंह गुर्जर, संस्कृत विभाग द्वारा किया गया। कार्यक्रम के अंत में महाविद्यालय की ओर से सभी छात्र-छात्राओं के लिए स्वल्पाहार की व्यवस्था की गई। संगोष्ठी में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं, प्राध्यापक एवं अतिथि मौजूद रहे। कार्यक्रम ने विद्यार्थियों को अपने अधिकारों, कर्तव्यों और कानूनी उपायों के प्रति जागरूक करने के साथ संकट की परिस्थितियों में कानून का सहारा लेने का महत्वपूर्ण संदेश दिया।
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