
जावरा। श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान की नवमी वर्षगांठ के अवसर पर शुक्रवार, 16 अक्टूबर को जावरा में पांच दिवसीय धार्मिक आयोजन का शुभारंभ हुआ। गंगवाल परिवार के सान्निध्य में आयोजित कार्यक्रम की शुरुआत मंगल कलश शोभायात्रा से हुई। ढोल-धमाकों के साथ निकली शोभायात्रा के मंदिर पहुंचने के बाद श्री जिनेंद्र भगवान का अभिषेक किया गया। इसके बाद विधि-विधान के साथ योगसार विधान का शुभारंभ हुआ। आयोजन 16 से 20 अक्टूबर तक चलेगा।
मंगल कलश शोभायात्रा के बाद हुई धार्मिक विधियां
प्रातः निवास स्थान से मंगल कलश शोभायात्रा निकाली गई। शोभायात्रा के मंदिर पहुंचने के बाद श्री जिनेंद्र भगवान का अभिषेक किया गया। इसके बाद मंगल कलश, उपकलश, चार कलश, अष्ट प्रतिहार, अष्ट मंगल और जिनवाणी को विधि-विधानपूर्वक विराजमान कराया गया।
धार्मिक अनुष्ठान के दौरान श्रद्धालुओं ने भक्तिभाव के साथ पूजा-अर्चना की। पूरे आयोजन स्थल पर धार्मिक और आध्यात्मिक वातावरण देखने को मिला।
गंगवाल परिवार ने संभाली प्रमुख धार्मिक जिम्मेदारियां
मुख्य कलश की स्थापना श्रीमती पदमा-पुष्पेंद्र-प्रवेश जी गंगवाल एवं गंगवाल परिवार द्वारा की गई। सहायक कलश की स्थापना श्रीमती मीना जी निर्मल कुमार जैन वेद, श्रीमती रेखा अभय सुराणा, श्रीमती अविना युगल पाटनी ने की।
झंडारोहण का सौभाग्य रतलाम के गेंदा लाल जी-एल महेंद्र कुमार जी मोठिया परिवार को मिला। वहीं जिनवाणी विराजमान करने का सौभाग्य श्रीमती अल्पना-अतुल कुमार जैन, मैनपुरी को प्राप्त हुआ।
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प्रतिदिन होंगे विधान, प्रवचन और जिनेंद्र भक्ति
आयोजन में पंडित मनीष जी शास्त्री और विधानाचार्य रितेश जी शास्त्री के मार्गदर्शन में धार्मिक अनुष्ठान और प्रवचन आयोजित किए जा रहे हैं। आयोजन के दौरान श्रद्धालुओं को जिनवाणी श्रवण, धार्मिक प्रवचन और जिनेंद्र भक्ति का लाभ मिल रहा है।
उपलब्ध कार्यक्रम के अनुसार प्रतिदिन सुबह अभिषेक और नित्य नियम पूजा के बाद विधान एवं प्रवचन होंगे। दोपहर और रात में भी प्रवचन तथा शाम को जिनेंद्र भक्ति का आयोजन किया जाएगा।
धर्मप्रेमी श्रद्धालुओं से सहभागी बनने का आह्वान
गंगवाल परिवार ने सभी धर्मप्रेमी श्रद्धालुओं से धार्मिक महोत्सव में सहभागी बनने का आग्रह किया है। आयोजकों ने श्रद्धालुओं से जिनेंद्र भगवान की आराधना, विधान, प्रवचन और जिनवाणी श्रवण का लाभ लेने की अपील की है।
पांच दिवसीय आयोजन के माध्यम से जावरा में धर्म, भक्ति और आध्यात्मिक साधना का वातावरण बना हुआ है। आयोजकों और जैन समाजजनों में भी आयोजन को लेकर उत्साह देखा जा रहा है।
श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान की नवमी वर्षगांठ पर शुरू हुए योगसार विधान के पहले दिन मंगल कलश शोभायात्रा और धार्मिक अनुष्ठानों ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया। आगामी दिनों में विधान, प्रवचन और जिनेंद्र भक्ति के विभिन्न कार्यक्रम आयोजित होंगे।
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