
नाह़रु खान|जावरा में विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार सुरक्षा संगठन, जिला रतलाम-जावरा की ओर से महिला सुरक्षा एवं मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। शनिवार, 10 अक्टूबर को माधवानन्द एकेडमी, स्वामीजी की कुटिया में हुए कार्यक्रम में महिलाओं और युवतियों को मानसिक स्वास्थ्य, आत्मसम्मान, सुरक्षा और अधिकारों के प्रति जागरूक किया गया। कार्यक्रम में बच्चों और युवाओं के संतुलित मानसिक विकास पर भी चर्चा हुई।
सरस्वती और भारत माता के चित्र पर माल्यार्पण से शुरुआत
कार्यक्रम का शुभारंभ सरस्वती माता और भारत माता के चित्र पर माल्यार्पण के साथ हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता संगठन के जिला अध्यक्ष राजकुमार हरण ने की। उन्होंने अतिथियों और उपस्थित लोगों का स्वागत करते हुए कहा कि महिला सुरक्षा और मानसिक स्वास्थ्य को लेकर समाज में लगातार जागरूकता बढ़ाने की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि जब महिलाएं और युवतियां सुरक्षित होने के साथ अपने अधिकारों के प्रति जागरूक और मानसिक रूप से सशक्त होंगी, तभी स्वस्थ और सशक्त समाज का निर्माण संभव होगा। उन्होंने महिला सम्मान और सुरक्षा को सामाजिक विकास का महत्वपूर्ण आधार बताया।
बच्चों में हिंसक प्रवृत्तियों पर जताई चिंता
कार्यक्रम के प्रमुख वक्ता राजेन्द्र श्रोत्रिय ने बच्चों में बढ़ती हिंसक प्रवृत्तियों पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि बच्चों के व्यवहार और मानसिक विकास में परिवार और घर के वातावरण की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
उन्होंने बच्चों को सही संस्कार, शिक्षा और सकारात्मक मार्गदर्शन देने पर जोर दिया। उनका कहना था कि बच्चों के व्यवहार को समझने के लिए केवल उन्हें जिम्मेदार ठहराना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनके आसपास के वातावरण और परवरिश पर भी ध्यान देना जरूरी है।
राजेन्द्र श्रोत्रिय ने बच्चों को मोबाइल का अनावश्यक इस्तेमाल कम करने की सलाह दी। उन्होंने पढ़ाई, रचनात्मक गतिविधियों और परिवार के साथ संवाद को बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए महत्वपूर्ण बताया।
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बेटी को पढ़ाने के साथ निर्भय बनाना जरूरी
मुख्य अतिथि एवं अंतरराष्ट्रीय जैन दिवाकर विचार मंच के राष्ट्रीय वरिष्ठ मार्गदर्शक अभय सुराणा ने महिला सुरक्षा और नारी सम्मान पर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि बेटियों को केवल शिक्षित करना ही नहीं, बल्कि उन्हें निर्भय और आत्मविश्वासी बनाना भी जरूरी है।
उन्होंने कहा कि महिलाओं की सुरक्षा केवल कानून-व्यवस्था से जुड़ा विषय नहीं है, बल्कि पूरे समाज की जिम्मेदारी है। परिवार और समाज को ऐसा वातावरण तैयार करना चाहिए, जहां महिलाएं अपने सपनों को पूरा करते हुए आत्मसम्मान के साथ जीवन जी सकें।
अभय सुराणा ने छात्राओं को परिस्थितियों का विवेकपूर्ण सामना करने और अपने अधिकारों के प्रति सजग रहने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने व्यक्तित्व विकास और जीवन में सकारात्मक सोच के महत्व पर भी चर्चा की।
छात्राओं ने मानसिक विकास पर रखे विचार
कार्यक्रम में माधवानन्द एकेडमी की छात्रा जानवी नेका और कुसुम शर्मा ने युवतियों की मानसिकता, मानसिक स्वास्थ्य और मस्तिष्क के विकास से जुड़े विषयों पर अपने विचार रखे। दोनों छात्राओं ने सकारात्मक सोच और जागरूकता के महत्व को सामने रखा।
उनके विचारों और प्रस्तुति से प्रभावित होकर संगठन की ओर से दोनों छात्राओं का सम्मान किया गया और उन्हें पुरस्कृत कर प्रोत्साहित किया गया। आयोजकों ने इसे छात्राओं में आत्मविश्वास बढ़ाने और सामाजिक मुद्दों पर अपनी बात रखने के लिए प्रोत्साहित करने की पहल बताया।
अतिथियों का किया गया सम्मान
कार्यक्रम के दौरान संगठन के पदाधिकारियों ने प्रमुख वक्ता राजेन्द्र श्रोत्रिय और मुख्य अतिथि अभय सुराणा का माला पहनाकर और शाल ओढ़ाकर सम्मान किया। कार्यक्रम का संचालन मनीष शर्मा ने किया, जबकि वरिष्ठ उपाध्यक्ष कनकमल चौरड़िया ने आभार व्यक्त किया।
इस अवसर पर संगठन के सचिव शैलेंद्र श्रीश्रीमाल, कोषाध्यक्ष अनिल श्रीश्रीमाल और मीडिया प्रभारी प्रतीक लौढ़ा सहित अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे।
जावरा में आयोजित कार्यक्रम में मानसिक स्वास्थ्य, महिला सुरक्षा, आत्मसम्मान और बच्चों के संतुलित विकास जैसे विषयों पर जागरूकता का संदेश दिया गया। वक्ताओं ने महिलाओं और युवतियों की सुरक्षा को सामाजिक जिम्मेदारी बताते हुए परिवार और समाज की सक्रिय भूमिका पर जोर दिया।
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