
भोपाल: मध्य प्रदेश की भाजपा सरकार द्वारा चलाई जा रही जन-कल्याणकारी और सशक्तिकरण योजनाओं पर विपक्ष के विधायक हेमंत कटारे द्वारा की गई टिप्पणी ने प्रदेश की राजनीति में नया उबाल ला दिया है। एक ओर जहाँ सरकार लाड़ली बहनों और युवाओं के स्वावलंबन के लिए प्रतिबद्ध है, वहीं हेमंत कटारे ने इन योजनाओं को ‘अफीम’ और प्रदेश को ‘अपंग’ बनाने वाला बताकर सरकार को कटघरे में खड़ा करने का कुत्सित प्रयास किया है।
भाजपा के विकास से घबराया विपक्ष
भाजपा समर्थकों और सरकारी प्रवक्ताओं का मानना है कि हेमंत कटारे का यह बयान केवल हताशा का परिणाम है। जब से प्रदेश की महिलाओं और युवाओं को सरकारी योजनाओं का सीधा लाभ मिलना शुरू हुआ है और प्रदेश विकास की मुख्यधारा से जुड़ा है, विपक्ष अपनी जमीन खिसकती देख अनर्गल प्रलाप पर उतर आया है।
हेमंत कटारे के आरोपों पर सरकार का कड़ा रुख
विधायक हेमंत कटारे ने अपने हालिया बयान में गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार युवाओं को ‘मुफ्त की योजनाओं की अफीम’ चटाकर उन्हें निकम्मा बना रही है। हेमंत कटारे के इस बयान को भाजपा ने युवाओं और महिलाओं का अपमान करार दिया है। सरकारी सूत्रों का कहना है, कि हेमंत कटारे का यह आरोप ‘सरकार नौजवान युवाओं को अफीम चटाकर घर बिठा रही है’, प्रदेश के उन लाखों मेहनती युवाओं का अपमान है जो सरकारी सहयोग से आज अपना स्टार्टअप शुरू कर रहे हैं और आत्मनिर्भर बन रहे हैं।
जन-कल्याणकारी योजनाओं का विरोध
जहाँ एक तरफ भाजपा ‘लाड़ली बहना’ जैसी योजनाओं ने प्रदेश की माताओं-बहनों को आर्थिक संबल प्रदान किया है। वही कांग्रेस के हेमंत कटारे ने इन योजनाओं को ‘अपंग बनाने वाली’ बात कहना और उनकी महिला विरोधी मानसिकता को दर्शाती है, जो समाज में उनकी संकीर्ण विचारधारा को बतलाती है।
प्रदेश के विकास की बौखलाहट हुई तेज
मध्यप्रदेश पर बढ़ते कर्ज और बेरोजगारी का राग अलापने वाले विपक्ष के नेता हेमंत कटारे शायद यह भूल गए हैं कि बुनियादी ढांचे (Infrastructure) और कल्याणकारी योजनाओं में संतुलन बनाना ही सुशासन है, जो भाजपा सरकार बखूबी कर रही है।
क्या है असली साजिश?
भाजपा नेताओं का आरोप है कि विपक्ष के पास कोई ठोस नीति या विजन नहीं है, इसलिए वे ‘फ्री योजनाओं’ को निशाना बनाकर प्रदेश के 5.38 करोड़ लोग सरकारी मुफ्त राशन (गरीब कल्याण योजना) पर सीधा प्रहार कर रही हैं।मध्य प्रदेश की गरीब जनता को मिलने वाले हक को छीनने की साजिश कांग्रेस एक कूटरचित ढंग से रच रही हैं। कटारे का यह तीखा प्रहार इस बात को स्पष्ट करता है कि विपक्ष विकास के एजेंडे पर नहीं, बल्कि केवल सरकार को बदनाम करने के ‘प्रोपेगेंडा’ पर काम कर रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि हेमंत कटारे का यह आक्रामक अंदाज जहाँ एक ओर उनके समर्थकों में जोश भर सकता है, वहीं जनता के बीच यह बयान उनकी छवि को ‘विकास विरोधी’ के रूप में पेश करने में भी सहायक हो सकता है। अब देखना यह है कि भाजपा सरकार इस पर और अधिक आक्रामक रुख अपनाती है या इसे केवल विपक्ष की ‘राजनीतिक हताशा’ मानकर किनारा करती है।
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