
सार
राकेश दर्दवंशी| जिले में स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करने वाला मामला सामने आया है। एक वृद्धाश्रम भवन में रखी लाखों रुपये की जीवन रक्षक दवाइयां बारिश के पानी से भीग गईं। बताया जा रहा है कि करीब 20 दिनों से हो रही बारिश के बीच कुछ दवाइयां खुले स्थान और छत पर पड़ी रहीं। मामले की तस्वीरें सामने आने के बाद कलेक्टर ने नाराजगी जताते हुए विभाग प्रमुख को नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा है। कलेक्टर ने यह भी पूछा है कि दवाइयां किन स्वास्थ्य केंद्रों तक पहुंचाई जानी थीं और इनके खराब होने की स्थिति कैसे बनी।
विस्तार
जिले में स्वास्थ्य विभाग की व्यवस्थाओं को लेकर सवाल खड़े करने वाला एक और मामला सामने आया है। आरोप है कि मरीजों के लिए जरूरी लाखों रुपये की जीवन रक्षक दवाइयां सुरक्षित भंडारण के बजाय बारिश के बीच खुले में पड़ी रहीं और पानी में भीग गईं। मामला सामने आने के बाद जिला प्रशासन ने इसे गंभीरता से लिया है।
जानकारी के अनुसार स्वास्थ्य विभाग ने एक वृद्धाश्रम भवन को दवाइयों के भंडारण के लिए उपयोग में लिया है। भवन के कमरों में बड़ी मात्रा में दवाइयां रखी हुई हैं। वहीं, कुछ दवाइयां खुले स्थान और छत पर रखे होने की बात सामने आई है। लगातार बारिश के चलते इन दवाइयों के भीगने और खराब होने की तस्वीरें सामने आई हैं।
बताया जा रहा है कि जिले में करीब 20 दिनों से बारिश का दौर जारी है। ऐसे में खुले में रखी दवाइयों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है। दवाइयां मरीजों और जरूरतमंदों तक पहुंचने के लिए स्वास्थ्य विभाग के स्टोर में पहुंचाई गई थीं, लेकिन उनका उचित भंडारण और समय पर संबंधित स्वास्थ्य केंद्रों तक वितरण नहीं होने की स्थिति ने व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
मामले की तस्वीरें सामने आने के बाद कलेक्टर ने कड़ी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग के संबंधित अधिकारी से स्पष्टीकरण मांगा है। कलेक्टर ने यह स्पष्ट करने को कहा है कि दवाइयां खुले में क्यों रखी गईं, उनके खराब होने की स्थिति कैसे बनी और इन दवाइयों का वितरण जिले के किन-किन स्वास्थ्य केंद्रों के लिए किया जाना था।
इस पूरे मामले ने सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था में दवाइयों के भंडारण और वितरण की व्यवस्था पर भी सवाल खड़े किए हैं। एक ओर अस्पतालों और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में मरीजों को आवश्यक दवाइयां उपलब्ध कराने पर जोर दिया जाता है, वहीं दूसरी ओर यदि सरकारी दवाइयां ही उचित रखरखाव के अभाव में खराब हो जाती हैं तो इससे सरकारी संसाधनों के नुकसान के साथ मरीजों को मिलने वाली स्वास्थ्य सेवाओं पर भी असर पड़ सकता है।
अब कलेक्टर के नोटिस के बाद स्वास्थ्य विभाग की ओर से क्या जवाब दिया जाता है और दवाइयों के खराब होने के लिए जिम्मेदारी किसकी तय होती है, यह देखने वाली बात होगी। साथ ही यह भी स्पष्ट होना बाकी है कि कितनी मात्रा में दवाइयां बारिश से प्रभावित हुईं और इनमें से कितनी दवाइयां उपयोग योग्य बची हैं। मामले में विभागीय जवाब और जांच के बाद स्थिति और स्पष्ट होने की उम्मीद है।
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