
लखनऊ/यूपी: गंगा एक्सप्रेसवे के किनारे विकसित हो रहे इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग एंड लॉजिस्टिक्स क्लस्टर्स (IMLC) अब केवल इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट नहीं, बल्कि हाई-इंसेंटिव इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के रूप में उभर रहे हैं। योगी सरकार की नीतियों के तहत यहां निवेशकों के लिए व्यापक प्रोत्साहन और सुविधाओं का पूरा पैकेज तैयार किया गया है।
नीति के तहत निवेशकों को कैपिटल सब्सिडी और एसजीएसटी रिइम्बर्समेंट के जरिए लागत में बड़ी राहत दी जा रही है। इसके अलावा पात्र इकाइयों को एलिजिबल कैपिटल इनवेस्टमेंट (ECI) पर 42% तक कैपिटल सब्सिडी और ईसीआई के 300% तक 100% नेट एसजीएसटी रिइम्बर्समेंट का लाभ मिल रहा है, जिससे उद्योगों की शुरुआती लागत में महत्वपूर्ण कमी आ रही है।
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सरकार ने निवेश आकर्षित करने के लिए भूमि और टैक्स में भी विशेष रियायतें दी हैं, जिसके तहत सरकारी भूमि पर फ्रंट-एंड लैंड सब्सिडी 80% तक और कैपिटल सब्सिडी 35% तक की सुविधा उपलब्ध है। वहीं, IMLC में उद्योग स्थापित करने पर स्टाम्प ड्यूटी में 100% छूट दी जा रही है।
औद्योगिक विकास को गति देने के लिए ऊर्जा और नवाचार क्षेत्र में भी प्रोत्साहन दिए गए हैं, जिसके तहत बड़ी कंपनियों को 5 वर्षों तक बिजली शुल्क में 100% छूट, ग्रीन इंडस्ट्री के लिए ₹2.5 करोड़ तक इंसेंटिव और अनुसंधान एवं विकास (R&D) के लिए ₹10 करोड़ तक ग्रांट की व्यवस्था की गई है।
निवेश प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए ‘निवेश मित्र’ सिंगल विंडो पोर्टल के माध्यम से 500 से अधिक सेवाएं ऑनलाइन उपलब्ध कराई गई हैं, जिसमें भूमि आवंटन, अनुमोदन और इंसेंटिव ट्रैकिंग शामिल है। इसके साथ ही IMLC में स्थापित इकाइयों को केंद्र की PLI योजना के साथ 30% तक अतिरिक्त टॉप-अप का भी लाभ दिया जा रहा है, जिससे मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को और मजबूती मिलने की उम्मीद है।
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