
भोपाल। मध्य प्रदेश सरकार ने स्वास्थ्य और खाद्य सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए एनालॉग पनीर के उत्पादन, बिक्री और इस्तेमाल पर रोक लगाने का फैसला किया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 12 अगस्त 2026 को इस निर्णय की जानकारी दी। सरकार का कहना है कि प्रदेश में प्राकृतिक और दूध से बने डेयरी उत्पादों को बढ़ावा दिया जाएगा।
एनालॉग पनीर क्या है और क्यों लिया गया फैसला?
एनालॉग पनीर ऐसे उत्पादों को कहा जाता है, जिन्हें पारंपरिक दूध से बने पनीर के विकल्प के रूप में तैयार किया जाता है। इनमें दूध के बजाय या उसके साथ वनस्पति वसा, स्टार्च, इमल्सीफायर और अन्य सामग्री का इस्तेमाल किया जा सकता है। खाद्य सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं और उपभोक्ताओं को वास्तविक पनीर तथा उसके विकल्प के बीच स्पष्ट अंतर बताने की जरूरत के चलते ऐसे उत्पादों पर निगरानी बढ़ी है।
सरकार प्राकृतिक डेयरी उत्पादों को देगी बढ़ावा
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में प्राकृतिक, दूध आधारित पनीर और अन्य डेयरी उत्पादों को बढ़ावा दिया जाएगा। सरकार का उद्देश्य उपभोक्ताओं को गुणवत्तापूर्ण खाद्य सामग्री उपलब्ध कराना और प्रदेश के डेयरी क्षेत्र को प्रोत्साहित करना है। अधिकारियों को प्रतिबंध के प्रभावी पालन और नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।
खाद्य सुरक्षा पर बढ़ी निगरानी
एनालॉग डेयरी उत्पादों को लेकर देशभर में खाद्य सुरक्षा और लेबलिंग पर चर्चा बढ़ी है। एफएसएसएआई की सामग्री में भी डेयरी एनालॉग्स की अलग पहचान, नामकरण और लेबलिंग की जरूरत पर जोर दिया गया है।
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