
मैहर।देवेश शर्मा| पूर्व विधायक नारायण त्रिपाठी ने केंद्र सरकार पर लोकतांत्रिक मूल्यों की अनदेखी और संविधान की भावना के विपरीत काम करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि देश में लोकतंत्र और युवाओं के भविष्य को लेकर चिंता का माहौल है। उन्होंने विभिन्न राष्ट्रीय मुद्दों पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए सरकार की नीतियों की आलोचना की।
सोनम वांगचुक के आंदोलन की सराहना
नारायण त्रिपाठी ने शिक्षाविद् सोनम वांगचुक के आंदोलन की सराहना करते हुए उन्हें “21वीं सदी का गांधी” बताया। उन्होंने कहा कि युवाओं के अधिकारों के लिए किया गया उनका अहिंसक संघर्ष प्रेरणादायक है। साथ ही उन्होंने अभिजीत दीपके की भी सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने युवाओं की आवाज को जंतर-मंतर से संसद तक पहुंचाने का प्रयास किया।
प्रदर्शन और युवाओं के मुद्दों पर उठाए सवाल
पूर्व विधायक ने 20 जुलाई को हुए युवा प्रदर्शन का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे युवाओं के साथ सख्ती बरती गई। उन्होंने कहा कि छात्र, किसान, मजदूर और अन्य वर्गों के आंदोलनों के प्रति सरकार का रवैया लोकतांत्रिक परंपराओं के अनुरूप नहीं है।
भर्ती प्रक्रिया और बेरोजगारी पर जताई चिंता
नारायण त्रिपाठी ने कहा कि सरकारी विभागों में बड़ी संख्या में पद रिक्त हैं, जबकि भर्ती प्रक्रियाएं लंबी और जटिल होती जा रही हैं। उन्होंने परीक्षा प्रणाली, कथित पेपर लीक और नियुक्तियों में देरी को लेकर भी चिंता व्यक्त की और कहा कि इससे युवाओं का भविष्य प्रभावित हो रहा है।
अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर भी रखी बात
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सभी नागरिकों को अपनी बात शांतिपूर्ण ढंग से रखने का अधिकार है। उन्होंने संविधान की भावना के अनुरूप युवाओं के अधिकारों की रक्षा और रोजगार के अवसर बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया।
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