
मैहर: विश्वविख्यात शक्तिपीठ माँ शारदा के धाम में इस समय आस्था और प्रशासन के बीच बड़ा टकराव देखने को मिल रहा है। स्थानीय प्रशासन के निर्देश पर माँ शारदा धाम परिसर स्थित हजारों वर्ष पुराने ‘मनोकामनेश्वर शिव मंदिर’ के गर्भगृह में ताला जड़ दिया गया है।
यह कार्रवाई भक्तों के लिए न केवल हैरानी की बात है, बल्कि उनके सब्र का बांध भी तोड़ दिया। आखिर क्यों बंद किया गया भगवान का द्वार? क्या इसके पीछे कोई बड़ा खेल है? आइए जानें इस विवाद की पूरी कहानी।
मंदिर प्रशासन पर गंभीर आरोप
बीते दिनों मैहर कलेक्टर पर आरोप है कि प्राचीन मंदिर और ऐतिहासिक बावली को ‘अटाला आर्ट’ की प्रमुख अंबिका बैरी को सौंप दिया गया है, जिससे मंदिर पप्रशासन पर गंभीर आरोप लगे है।
घोटाले की आशंका
सौंदर्यीकरण के नाम पर लाखों रुपये के घोटाले की संभावनाएं जताई जा रही हैं। बिना किसी सार्वजनिक सूचना या धार्मिक परामर्श के गर्भगृह को बंद कर दिया गया है, जिससे भक्तों का गुस्सा अब सातवें आसमान पर है। उनका मानना है कि विरासत को सहेजने के नाम पर उसे निजी हाथों में गिरवी रखा जा रहा है।
भक्तों का मंदिर प्रशासन को अल्टीमेटम
शिव भक्तों ने प्रशासन को 24 घंटे का अल्टीमेटम दिया है। उनका कहना है कि यदि निर्धारित समय में ताला नहीं खुला, तो वे स्वयं ताला तोड़कर मंदिर में प्रवेश करेंगे और वहां मानस पाठ कर विरोध दर्ज कराएंगे।
राजनीतिक और धार्मिक तूल
इस पूरे मामले ने अब राजनीतिक और धार्मिक तूल पकड़ लिया है। एक तरफ प्रशासन की रहस्यमयी चुप्पी है, तो दूसरी तरफ भक्तों का अटूट विश्वास। क्या कलेक्टर महोदय इस आक्रोश को शांत कर पाएंगे? या मैहर की ये शांति किसी बड़े आंदोलन की आहट है?
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