
भोपाल/ भरत रावत: मध्यप्रदेश के किसानों के लिए सहकारी बैंकिंग व्यवस्था से जुड़ी बड़ी राहत सामने आई है। जिला सहकारी बैंकों और प्राथमिक कृषि साख समितियों (PACS) के माध्यम से मिलने वाले अल्पावधि फसल ऋण पर किसानों को एक वर्ष तक शून्य प्रतिशत ब्याज की सुविधा दी जाएगी। सरकार का उद्देश्य किसानों को खेती के लिए समय पर सस्ती वित्तीय सहायता उपलब्ध कराना और ब्याज के बोझ को कम करना है।
अपेक्स बैंक के प्रशासक महेंद्र सिंह यादव ने बताया कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की घोषणा के अनुरूप सहकारी क्षेत्र के माध्यम से किसानों तक ऋण सुविधाओं की पहुंच बढ़ाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। इसके तहत पात्र किसानों को किसान क्रेडिट कार्ड के माध्यम से फसल ऋण उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है।
3 लाख रुपये तक के फसल ऋण पर शून्य ब्याज
व्यवस्था के तहत पात्र किसानों को एक वर्ष की अवधि के लिए 3 लाख रुपये तक का अल्पावधि फसल ऋण शून्य प्रतिशत ब्याज पर उपलब्ध कराया जाएगा। इससे किसानों को खेती से जुड़े खर्चों के लिए आवश्यक राशि जुटाने में मदद मिलेगी।
फसल की बुआई से लेकर खाद, बीज, कीटनाशक और अन्य कृषि जरूरतों तक किसानों को समय-समय पर पूंजी की आवश्यकता होती है। ऐसे में सहकारी समितियों और जिला सहकारी बैंकों के माध्यम से मिलने वाली ऋण सुविधा किसानों के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।
सरकार की ओर से इस व्यवस्था को खास तौर पर उन किसानों तक पहुंचाने पर जोर दिया जा रहा है, जो सहकारी बैंकिंग व्यवस्था से अभी तक पर्याप्त रूप से नहीं जुड़ पाए हैं।
नए किसानों को सहकारी समितियों से जोड़ने पर जोर
महेंद्र सिंह यादव के मुताबिक नए और पात्र किसानों को सहकारी समितियों से जोड़ने का अभियान चलाया जा रहा है। किसान क्रेडिट कार्ड के माध्यम से पात्र किसानों को ऋण सुविधा उपलब्ध कराने की दिशा में काम किया जा रहा है।
इसका उद्देश्य केवल मौजूदा ऋण व्यवस्था को मजबूत करना ही नहीं, बल्कि अधिक से अधिक किसानों को संस्थागत कृषि ऋण प्रणाली से जोड़ना भी है। किसानों को साहूकारों या अनौपचारिक स्रोतों से महंगे कर्ज पर निर्भर न रहना पड़े, इसके लिए सहकारी संस्थाओं के माध्यम से आसान ऋण उपलब्ध कराने की व्यवस्था को बढ़ाया जा रहा है।
2026 को कृषक कल्याण वर्ष के रूप में मनाया जा रहा
मध्यप्रदेश में वर्ष 2026 को कृषक कल्याण वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है। इसी क्रम में सहकारिता क्षेत्र के माध्यम से किसानों को आर्थिक सहायता और ऋण सुविधाएं उपलब्ध कराने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
सरकार का फोकस कृषि क्षेत्र में वित्तीय पहुंच बढ़ाने पर है, ताकि किसानों को खेती के महत्वपूर्ण समय पर पैसों की कमी का सामना न करना पड़े। जिला सहकारी बैंक और PACS समितियां इस व्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।
जिला सहकारी बैंक और PACS बनेंगे किसानों की मदद का माध्यम
अल्पावधि फसल ऋण की सुविधा किसानों तक पहुंचाने में जिला सहकारी बैंकों और प्राथमिक कृषि साख समितियों की भूमिका अहम है। इन संस्थाओं के माध्यम से किसानों को उनकी पात्रता के आधार पर ऋण उपलब्ध कराया जाता है।
सरकार चाहती है कि अधिक से अधिक पात्र किसान इस व्यवस्था से जुड़ें और खेती के लिए संस्थागत ऋण का लाभ उठाएं। इससे किसानों को समय पर आर्थिक सहायता मिलने के साथ ही कृषि गतिविधियों को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है।
ब्याज के बोझ से राहत देने की कोशिश
खेती में लागत लगातार महत्वपूर्ण मुद्दा बनी हुई है। बीज, खाद, सिंचाई, कृषि उपकरण और अन्य इनपुट पर खर्च के बीच किसान के लिए ऋण पर लगने वाला ब्याज भी अतिरिक्त आर्थिक दबाव पैदा करता है। ऐसे में एक वर्ष के लिए शून्य प्रतिशत ब्याज की सुविधा किसानों के लिए राहत का माध्यम बन सकती है।
इस योजना के जरिए सरकार का उद्देश्य किसानों को फसल उत्पादन के लिए आवश्यक पूंजी उपलब्ध कराना है, ताकि आर्थिक संसाधनों की कमी खेती के काम में बाधा न बने।
किसानों को क्या करना होगा?
इस सुविधा का लाभ लेने के इच्छुक किसानों को अपनी संबंधित सहकारी समिति या जिला सहकारी बैंक से संपर्क कर पात्रता, किसान क्रेडिट कार्ड और ऋण से जुड़ी आवश्यक जानकारी प्राप्त करनी होगी।
किसानों को ऋण की शर्तों, पात्रता, दस्तावेज और समयसीमा की जानकारी संबंधित संस्था से ही लेनी चाहिए। अलग-अलग मामलों में पात्रता और प्रक्रिया के आधार पर आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करनी पड़ सकती हैं।
कुल मिलाकर, मध्यप्रदेश में सहकारी व्यवस्था के जरिए किसानों को 3 लाख रुपये तक के अल्पावधि फसल ऋण पर एक वर्ष के लिए शून्य प्रतिशत ब्याज की सुविधा देने की पहल खेती के लिए वित्तीय सहायता को आसान बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। सरकार का लक्ष्य अधिक से अधिक पात्र किसानों को सहकारी समितियों और किसान क्रेडिट कार्ड व्यवस्था से जोड़कर उन्हें समय पर ऋण उपलब्ध कराना है।
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