
भोपाल/रानू परिहार की रिपोर्ट: मध्यप्रदेश में बारिश के मौसम के दौरान जर्जर और अनुपयोगी स्कूल भवनों से होने वाले संभावित हादसों को रोकने के लिए राज्य शिक्षा केंद्र ने सख्त निर्देश जारी किए हैं। राज्य शिक्षा केंद्र के संचालक हरजिंदर सिंह और आयुक्त लोक शिक्षण अभिषेक सिंह ने संयुक्त आदेश जारी कर सभी जिलों के जिला शिक्षा अधिकारियों और जिला परियोजना समन्वयकों को जीर्ण-शीर्ण, जर्जर और अनुपयोगी शासकीय शाला भवनों के संबंध में तत्काल कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।
कलेक्टर की अनुमति लेकर तुरंत गिराए जाएंगे जर्जर भवन
राज्य शिक्षा केंद्र की ओर से 17 अगस्त 2026 को जारी आदेश में कहा गया है कि जो शासकीय स्कूल भवन जीर्ण-शीर्ण, जर्जर या अनुपयोगी स्थिति में हैं, उन्हें नियमानुसार ध्वस्त कराया जाए। विभागीय निर्देशों के अनुसार ऐसे भवनों को Dismantle यानी ध्वस्त करने की अनुमति कलेक्टर द्वारा प्रदान की जाती है। कलेक्टर से अनुमति मिलने के बाद संबंधित अधिकारियों को बिना अनावश्यक देरी के ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया पूरी कराने के निर्देश दिए गए हैं। विभाग का उद्देश्य ऐसे भवनों में बच्चों, शिक्षकों और अन्य लोगों के प्रवेश को रोककर संभावित दुर्घटनाओं को टालना है।
ध्वस्तीकरण नहीं हुआ तो लाल रंग से लगेगा चेतावनी निशान
आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि किसी कारण से जर्जर भवन को तत्काल ध्वस्त नहीं किया जा सका है, तो उसके मुख्य द्वार अथवा बाहरी दीवार पर दूर से दिखाई देने वाला 3×3 फीट का गहरे लाल रंग का क्रॉस (X) बनाया जाएगा। इसके साथ ही भवन पर स्पष्ट चेतावनी नोटिस भी लगाया जाएगा, जिसमें लिखा होगा “यह भवन जर्जर / ध्वस्त घोषित किया जा चुका है और इसे खाली करने या गिराने के आदेश जारी किए गए हैं।” इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि बच्चे, शिक्षक, अभिभावक और आम नागरिक गलती से भी ऐसे भवन में प्रवेश न करें।
जर्जर भवन में कक्षा संचालन पर पूरी तरह रोक
राज्य शिक्षा केंद्र ने निर्देश दिए हैं कि जीर्ण-शीर्ण भवनों का नियमानुसार वर्गीकरण जल्द पूरा किया जाए। ऐसे भवनों में किसी भी स्थिति में कक्षाएं संचालित नहीं की जाएंगी। विभाग ने स्पष्ट किया है कि वैकल्पिक व्यवस्था उपलब्ध नहीं होने का हवाला देकर भी जर्जर भवन में बच्चों को बैठाकर पढ़ाई नहीं कराई जा सकती। विद्यार्थियों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए आवश्यक वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
कलेक्टर और जिला पंचायत CEO को भी भेजी गई आदेश की प्रति
राज्य शिक्षा केंद्र के इस आदेश की प्रतिलिपि प्रदेश के सभी कलेक्टरों, संभागीय संयुक्त संचालक शिक्षा तथा जिला पंचायतों के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों को भी भेजी गई है। इससे जर्जर भवनों के चिन्हांकन, ध्वस्तीकरण और आवश्यक कार्रवाई में शिक्षा, राजस्व तथा पंचायत विभाग के बीच समन्वय सुनिश्चित किया जा सकेगा।
बारिश के मौसम में बढ़ जाता है हादसों का खतरा
प्रदेश के कई जिलों में बड़ी संख्या में पुराने शासकीय स्कूल भवन मौजूद हैं। इनमें कई भवनों की छत और दीवारें कमजोर हो चुकी हैं। बरसात के दौरान छत से प्लास्टर गिरने, दीवारों में दरार आने और भवनों में पानी भरने जैसी समस्याएं सामने आती रही हैं। ऐसे में राज्य शिक्षा केंद्र के ताजा निर्देशों को बच्चों की सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विभाग का मानना है कि आदेश के बाद जिलों में जर्जर स्कूल भवनों का भौतिक सत्यापन तेज होगा और खतरनाक भवनों को चिन्हित कर उन पर तत्काल कार्रवाई की जा सकेगी। राज्य शिक्षा केंद्र ने संबंधित अधिकारियों को निर्देशों का गंभीरता से पालन सुनिश्चित करने को कहा है, ताकि किसी भी जर्जर भवन के कारण विद्यार्थियों और शिक्षकों की सुरक्षा खतरे में न पड़े।
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