एमपी इन्वेस्टर समिट की आड़ में ‘अधिकारियों’ का बड़ा खेल? बाहरी निवेशकों से ‘सांठगांठ’ और स्थानीय व्यापार का गला घोंटने की तैयारी?

मध्य प्रदेश को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए सरकार ने बड़े-बड़े इन्वेस्टर समिट्स आयोजित किए। दावे किए गए कि इससे प्रदेश की कायाकल्प होगी, युवाओं को रोजगार मिलेगा और स्थानीय व्यापार को बढ़ावा मिलेगा। लेकिन क्या वास्तव में ऐसा हो रहा है? या फिर इन समिट्स की आड़ में भ्रष्टाचार का एक नया और ‘साइलेंट’ मॉडल तैयार कर लिया गया है? आज ब्रांडवाणी समाचार पर हम करेंगे बड़ा खुलासा।
मध्य प्रदेश में मोहन यादव सरकार के आने के बाद निवेश को लेकर हलचल तेज है, लेकिन इसी हलचल के पीछे एक गहरा सन्नाटा भी है—वह सन्नाटा जो प्रदेश के स्थानीय उद्यमियों और काबिल प्रोजेक्ट्स को हाशिए पर धकेले जाने से पैदा हुआ है।
सूत्रों और गंभीर आरोपों की मानें तो, प्रदेश के विभिन्न विभागों के मुखिया अब राज्य के छोटे या मध्यम व्यापारियों को ‘घास’ तक नहीं डाल रहे हैं। आरोप लग रहे हैं कि विभागों के आला अधिकारी बाहरी निवेशकों और बड़े औद्योगिक घरानों के साथ मिलकर ‘बंद कमरों’ में मीटिंग्स कर रहे हैं। इन मीटिंग्स का मकसद विकास नहीं, बल्कि टेंडर की ऐसी ‘डिजाइनिंग’ है जिसमें केवल चुनिंदा बाहरी लोग ही फिट बैठ सकें।
टेंडर की खास सेटिंग: क्या विभागों में टेंडर अब जरूरतों के हिसाब से नहीं, बल्कि खास निवेशकों की प्रोफाइल देखकर बनाए जा रहे हैं? ताकि स्थानीय व्यापारी तकनीकी शर्तों की वजह से रेस से बाहर हो जाएं।
गैरों पर मेहरबानी, अपनों से दूरी: मध्य प्रदेश के वे अनुभवी बिजनेस घराने और इनोवेटिव प्रोजेक्ट्स, जो प्रदेश की सूरत बदल सकते हैं, उन्हें सरकार और प्रशासन सुनने को भी तैयार नहीं है।


भ्रष्टाचार का नया स्वरूप: बाहर के बड़े निवेशकों के साथ डील करने में न तो स्थानीय स्तर पर विरोध का डर है और न ही बदनामी का। सारा लेन-देन ‘गप-चुप’ तरीके से प्रदेश के बाहर ही निपटा लिया जाता है।

1. क्या डॉ. मोहन यादव की सरकार में अधिकारियों की मनमानी और ‘जेब भरने’ का खेल पहले से अधिक बढ़ गया है?
2. क्या सरकार जानबूझकर स्थानीय प्रतिभाओं को नजरअंदाज कर बाहरी पूंजीपतियों के लिए रेड कार्पेट बिछा रही है?
3. आखिर क्यों प्रदेश के मूल निवासियों के प्रोजेक्ट्स फाइलों में दबकर दम तोड़ रहे हैं?

अगर इन्वेस्टर समिट का असली मतलब सिर्फ बाहरी कंपनियों को प्रदेश के संसाधन सौंपना और अधिकारियों की तिजोरियां भरना है, तो यह मध्य प्रदेश के आत्मनिर्भर होने के सपने के साथ बड़ा धोखा है। स्थानीय व्यापारी आज खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहा है। ब्रांडवाणी समाचार सरकार से यह सवाल पूछता है कि आखिर ‘लोकल फॉर वोकल’ का नारा देने वाले राज्य में अपनों को ही क्यों नजरअंदाज किया जा रहा है?
देखते रहिए ब्रांडवाणी समाचार, सच हम दिखाएंगे।

  • mp-investor-summit-officials-nexus-external-investors-local-business-impact
gaurav singh rajput

gaurav singh rajput

Related Posts

एमपी कैबिनेट के बड़े फैसले: फास्ट ट्रैक कोर्ट, ₹7 हजार करोड़ निवेश समेत कई प्रस्तावों को मंजूरी

भोपाल।आदि मिश्रा| मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में…

आगे पढ़ें
कानून को अपने हाथ में लेने वालों पर कार्रवाई जरूरी: छात्र प्रदर्शनों पर सुप्रीम कोर्ट सख्त

छात्र प्रदर्शनों के दौरान देशभर में पुलिस कार्रवाई को…

आगे पढ़ें

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You Missed

एमपी कैबिनेट के बड़े फैसले: फास्ट ट्रैक कोर्ट, ₹7 हजार करोड़ निवेश समेत कई प्रस्तावों को मंजूरी

एमपी कैबिनेट के बड़े फैसले: फास्ट ट्रैक कोर्ट, ₹7 हजार करोड़ निवेश समेत कई प्रस्तावों को मंजूरी

भोपाल कूच पर अड़े किसान, आज CM हाउस घेराव की तैयारी; मूंग की 100% खरीदी की मांग

भोपाल कूच पर अड़े किसान, आज CM हाउस घेराव की तैयारी; मूंग की 100% खरीदी की मांग

इंदौर नगर निगम में एक के बाद एक घोटाले उजागर, ₹103 करोड़ फर्जी बिल मामले में ईडी की बड़ी कार्रवाई, वेतन घोटाले की जांच शुरू

इंदौर नगर निगम में एक के बाद एक घोटाले उजागर, ₹103 करोड़ फर्जी बिल मामले में ईडी की बड़ी कार्रवाई, वेतन घोटाले की जांच शुरू

कांग्रेस के टिकट पर लड़ चुके हैं चुनाव, फिर भी PM मोदी ने नंदन नीलेकणि पर क्यों जताया भरोसा? जानिए 5 बड़ी बातें

कांग्रेस के टिकट पर लड़ चुके हैं चुनाव, फिर भी PM मोदी ने नंदन नीलेकणि पर क्यों जताया भरोसा? जानिए 5 बड़ी बातें

CJP के बाद सोशल मीडिया पर छाया RHA, 35 लाख फॉलोअर्स के साथ E20 जनता पार्टी भी चर्चा में

CJP के बाद सोशल मीडिया पर छाया RHA, 35 लाख फॉलोअर्स के साथ E20 जनता पार्टी भी चर्चा में