
भोपाल। मध्य प्रदेश में महिलाओं और बच्चियों के लापता होने के आंकड़ों को लेकर हाई कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। इंदौर खंडपीठ ने मामले में केंद्र और राज्य सरकार सहित संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। याचिका में 2020 से जनवरी 2026 के बीच 2.74 लाख से अधिक महिलाओं और बच्चियों के लापता होने के सरकारी आंकड़ों का हवाला दिया गया है।
2.74 लाख से ज्यादा गुमशुदगी के मामले
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 2020 से 28 जनवरी 2026 तक मध्य प्रदेश में कुल 2,74,311 महिलाएं और बच्चियां लापता होने की सूचना दर्ज हुई। यह औसतन करीब 130 मामले प्रतिदिन बैठता है। विधानसभा में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की ओर से दिए गए लिखित जवाब में यह जानकारी सामने आई थी। इनमें से बड़ी संख्या में लोगों को ट्रेस किया गया, लेकिन हजारों मामले अभी भी लंबित बताए गए हैं।
हाई कोर्ट में दायर जनहित याचिका में लापता महिलाओं और बच्चों के मामलों की जांच और सरकारी आंकड़ों को सार्वजनिक करने की मांग उठाई गई है। याचिका में यह भी सवाल उठाया गया है कि 2024 से आगे के आंकड़ों की उपलब्धता और निगरानी व्यवस्था को लेकर पारदर्शिता कैसे सुनिश्चित की जा रही है।
हाई कोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकार से मांगा जवाब
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर पीठ ने मामले को गंभीरता से लेते हुए राज्य सरकार और केंद्र सरकार समेत संबंधित पक्षकारों को नोटिस जारी किया है। याचिका में लापता महिलाओं और बच्चों के मामलों में प्रभावी जांच, लंबित मामलों की स्थिति और बरामदगी से जुड़ी जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की गई है।
याचिकाकर्ता की ओर से यह भी चिंता जताई गई कि कुछ मामलों का संबंध मानव तस्करी, शोषण या अन्य गंभीर अपराधों से हो सकता है। हालांकि, किसी भी मामले में ऐसी आशंका को जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बिना तथ्य नहीं माना जा सकता। हाई कोर्ट के नोटिस के बाद अब सरकारों के जवाब से आगे की स्थिति स्पष्ट होगी।
महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा पर उठे सवाल
लापता होने के आंकड़ों ने प्रदेश में महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। सरकार के सामने चुनौती केवल गुमशुदगी दर्ज करने तक सीमित नहीं है, बल्कि हर मामले में समयबद्ध जांच, ट्रेसिंग और पीड़ितों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की भी है।
याचिका में लापता लोगों का जिलेवार डेटा सार्वजनिक करने और लंबित मामलों की स्थिति स्पष्ट करने की मांग भी की गई है। कोर्ट की कार्रवाई के बाद अब इस मामले में राज्य की जांच व्यवस्था और सरकार की जवाबदेही पर नजर रहेगी।
मध्य प्रदेश में महिलाओं और बच्चियों की गुमशुदगी के आंकड़ों ने सुरक्षा व्यवस्था पर बहस तेज कर दी है। सरकारी आंकड़ों में 2020 से जनवरी 2026 तक 2.74 लाख से अधिक मामले दर्ज होने की बात सामने आई है। अब हाई कोर्ट के नोटिस के बाद केंद्र और राज्य सरकार के जवाब से यह स्पष्ट होगा कि इन मामलों की निगरानी और जांच को लेकर आगे क्या कदम उठाए जाते हैं।
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