
मध्य प्रदेश पब्लिक हेल्थ सर्विसेज कॉर्पोरेशन लिमिटेड (MPPHC/MPPHSCL) की दवा खरीदी से जुड़ी प्रक्रिया में दो फार्मा फर्मों पर कार्रवाई की गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, फर्मों पर फर्जी दस्तावेज और दवाओं की गुणवत्ता से जुड़े आरोपों के बाद ब्लैकलिस्ट किया गया।
दवा खरीदी में गड़बड़ी के आरोप
मध्य प्रदेश में सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं के लिए दवाओं की खरीदी से जुड़ी प्रक्रिया को लेकर मामला सामने आया है। रिपोर्ट के अनुसार, MPPHSCL से जुड़े टेंडर में शामिल दो फार्मा कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई की गई। इन कंपनियों पर कथित तौर पर फर्जी दस्तावेज और दवाओं की गुणवत्ता से संबंधित अनियमितताओं के आरोप लगे।
दवा की गुणवत्ता को लेकर सरकारी स्तर पर जांच और परीक्षण की प्रक्रिया महत्वपूर्ण होती है। केंद्र सरकार के अनुसार, देश में दवाओं की गुणवत्ता की निगरानी Drugs and Cosmetics Act, 1940 और उससे जुड़े नियमों के तहत की जाती है।
दो कंपनियां ब्लैकलिस्ट, अधिकारी की भूमिका पर भी सवाल
रिपोर्ट के मुताबिक, कार्रवाई के बाद दो फर्मों को ब्लैकलिस्ट किया गया। हालांकि, इसी प्रक्रिया के दौरान जिम्मेदारी संभाल रहे एक अधिकारी की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि संबंधित अधिकारी को बाद में फिर से चीफ जनरल मैनेजर टेक्निकल की जिम्मेदारी दी गई।
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मामले में फर्मों पर कार्रवाई और प्रशासनिक स्तर पर जवाबदेही के बीच अंतर को लेकर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, किसी अधिकारी की व्यक्तिगत जिम्मेदारी या दोष तय होने की बात को अंतिम निष्कर्ष के रूप में नहीं देखा जा सकता, जब तक संबंधित जांच या सक्षम प्राधिकरण का निष्कर्ष सामने न आए।
दवाओं की गुणवत्ता जांच क्यों जरूरी?
सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में इस्तेमाल होने वाली दवाओं की गुणवत्ता सीधे सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़ी होती है। इसी वजह से दवा के नमूनों की जांच, निर्माण इकाइयों का निरीक्षण और नियमों का पालन सुनिश्चित करना जरूरी है।
केंद्र सरकार ने मार्च 2026 में बताया था कि दिसंबर 2022 से 960 से अधिक दवा निर्माण इकाइयों का जोखिम आधारित निरीक्षण किया गया और अनुपालन में कमी मिलने पर 860 से अधिक नियामकीय कार्रवाइयां की गईं।
मध्य प्रदेश में दवा खरीदी से जुड़ी दो फार्मा फर्मों पर कार्रवाई और ब्लैकलिस्टिंग के मामले ने सरकारी खरीद प्रक्रिया की निगरानी और जवाबदेही पर सवाल खड़े किए हैं। अब इस मामले में यह महत्वपूर्ण होगा कि संबंधित विभाग जांच के निष्कर्ष और कार्रवाई की पूरी जानकारी सार्वजनिक करता है या नहीं। साथ ही, सरकारी दवाओं की गुणवत्ता जांच और खरीद प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करना जरूरी है।
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