MP Politics: कौन है विवेक पटेल? मोहन सरकार में 1000 करोड़ की ‘दलाली’ के आरोपों से मचा हड़कंप, ट्रांसफर-पोस्टिंग के खेल का बड़ा खुलासा!

भोपाल। मध्य प्रदेश में सरकारें बदलती हैं, चेहरे बदलते हैं, लेकिन सत्ता के गलियारों में ‘दलाली‘ का सिंडिकेट खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। ताज़ा मामला मुख्यमंत्री मोहन यादव की सरकार के दौरान चर्चाओं में आए एक नाम ‘विवेक पटेल‘ का है। प्रशासनिक हलकों और गलियारों में चर्चा है कि यह शख्स ट्रांसफर-पोस्टिंग के नाम पर करोड़ों का ‘धंधा‘ कर रहा है।

·       मध्य प्रदेश की राजनीति में ‘बिचौलियों‘ के बढ़ते रसूख पर उठे सवाल।

·       विवेक पटेल नाम के व्यक्ति पर अफसरों को डराने और उगाही के गंभीर आरोप।

·       क्या ‘मोहन सरकार‘ की छवि को धूमिल कर रहे हैं सत्ता के करीबी होने का दावा करने वाले दलाल?

पर्दे के पीछे का खेल: अफसरों पर धौंस और करोड़ों का टर्नओवर

सूत्रों और चर्चाओं की मानें तो इस तथाकथित दलाल ने अधिकारियों के बीच अपना इतना खौफ पैदा कर दिया है कि बड़े-बड़े अफसर भी इसके रसूख के आगे नतमस्तक नजर आते हैं। आरोप है कि विवेक पटेल खुद को सरकार का बेहद करीबी बताकर अफसरों से ‘चट-पट‘ काम करवाता है और बदले में मोटी रकम वसूलता है।

1000 करोड़ का आंकड़ा और जातिवाद का तड़का

बाजार में गर्म चर्चाओं के अनुसार, इस सिंडिकेट का नकद 1000 करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है। इतना ही नहीं, इस पूरे खेल में ‘जातिवाद‘ का कार्ड भी बखूबी खेला जा रहा है। अपनी जाति और राजनीतिक पहुंच का हवाला देकर यह दलाल न केवल अधिकारियों को डराता है, बल्कि बिजनेसमैन और आम जनता से भी काम कराने के नाम पर भारी वसूली कर रहा है।

“सफेदपोशों की आड़ में पनपने वाले ये दलाल न केवल सिस्टम को खोखला कर रहे हैं, बल्कि ईमानदार अधिकारियों के मनोबल को भी तोड़ रहे हैं।” — (राजनीतिक विश्लेषक)

किसकी शह पर फल-फूल रहा है विवेक पटेल?

सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि आखिर विवेक पटेल को किसका संरक्षण प्राप्त है? बिना किसी संवैधानिक पद के, एक व्यक्ति कैसे प्रशासनिक नियुक्तियों में इतना हस्तक्षेप कर सकता है? क्या सरकार के भीतर बैठे कुछ प्रभावशाली लोग उसे शह दे रहे हैं?

विपक्ष और जनता के बीच अब यह सवाल उठने लगा है कि क्या मोहन सरकार इन ‘दलालों का अड्डा‘ बनती जा रही है? यदि इन आरोपों में रत्ती भर भी सच्चाई है, तो यह प्रदेश की पारदर्शी शासन व्यवस्था पर एक बड़ा काला धब्बा है।

जांच की मांग और सरकार की साख

सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में इस ‘1000 करोड़ी‘ नकद दावे ने खलबली मचा दी है। जनता अब मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से उम्मीद कर रही है कि वे ऐसे तत्वों पर नकेल कसेंगे जो उनके नाम का इस्तेमाल कर अपनी तिजोरियां भर रहे हैं। क्या सरकार इस मामले की निष्पक्ष जांच कराएगी या विवेक पटेल जैसे ‘बिचौलिए‘ यूं ही सिस्टम को दीमक की तरह चाटते रहेंगे?

  • gaurav singh rajput

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