
सार
आदि मिश्रा|भोपाल। मध्य प्रदेश में एक ओर भगवान श्रीकृष्ण से जुड़ी सांस्कृतिक और लोक परंपराओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए ‘श्रीकृष्ण पर्व’ का आयोजन किया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर प्रदेश की एकमात्र टेक्निकल यूनिवर्सिटी RGPV को तीन हिस्सों में बांटने के मोहन यादव कैबिनेट के फैसले पर सियासत शुरू हो गई है। ‘श्रीकृष्ण पर्व’ में प्रदेशभर के 1500 से ज्यादा स्थानीय कलाकार अलग-अलग सांस्कृतिक विधाओं की प्रस्तुति देंगे। वहीं RGPV के पुनर्गठन के बाद भोपाल, जबलपुर और उज्जैन में तीन नई तकनीकी एवं कौशल विश्वविद्यालय स्थापित होंगी। सरकार इसे तकनीकी शिक्षा के विकेंद्रीकरण और कौशल विकास से जोड़ने वाला कदम बता रही है, जबकि कांग्रेस ने विश्वविद्यालय का नाम बदलने को लेकर सरकार पर निशाना साधा है।
विस्तार
भोपाल। मध्य प्रदेश में भगवान श्रीकृष्ण से जुड़ी सांस्कृतिक और लोक परंपराओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के उद्देश्य से ‘श्रीकृष्ण पर्व’ का आयोजन किया जा रहा है। संस्कृति मंत्री धर्मेंद्र सिंह लोधी ने कहा कि यह आयोजन केवल एक कार्यक्रम नहीं है, बल्कि प्रदेश की सांस्कृतिक चेतना को जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास है।
‘श्रीकृष्ण पर्व’ में नृत्य-नाटिका, रासलीला, लोकगायन, भजन, कथक, भरतनाट्यम, ओडिसी, मटकी और स्टोरी टेलिंग सहित विभिन्न सांस्कृतिक माध्यमों के जरिए भगवान श्रीकृष्ण से जुड़ी परंपराओं को प्रस्तुत किया जाएगा। आयोजन की खास बात यह है कि प्रदेश के अलग-अलग जिलों से 1500 से अधिक स्थानीय कलाकारों को इससे जोड़ा गया है। सरकार का जोर स्थानीय कलाकारों और क्षेत्रीय संस्कृति को बड़े मंच के साथ-साथ गांव और कस्बों तक पहुंचाने पर है।
मंत्री धर्मेंद्र सिंह लोधी ने इसे संस्कृति के विकेंद्रीकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया है। सरकार का उद्देश्य प्रदेश की अलग-अलग लोक परंपराओं और स्थानीय प्रतिभाओं को मंच उपलब्ध कराना है, ताकि नई पीढ़ी इन सांस्कृतिक विरासतों से जुड़ सके।
इसी बीच मध्य प्रदेश की तकनीकी शिक्षा व्यवस्था में भी बड़ा बदलाव होने जा रहा है। मोहन यादव कैबिनेट द्वारा प्रदेश की एकमात्र टेक्निकल यूनिवर्सिटी राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय यानी RGPV को तीन हिस्सों में बांटने की मंजूरी के बाद प्रक्रिया शुरू हो गई है। पुनर्गठन के बाद भोपाल, जबलपुर और उज्जैन में तीन अलग-अलग तकनीकी एवं कौशल विश्वविद्यालय स्थापित की जाएंगी।
भोपाल में मौजूदा RGPV का नाम बदलकर ‘मध्यभारत प्रौद्योगिकी एवं कौशल विश्वविद्यालय’ किया जाएगा। इसके अंतर्गत भोपाल, नर्मदापुरम और ग्वालियर-चंबल संभाग के जिलों के तकनीकी कॉलेज संबद्ध रहेंगे।
दूसरी यूनिवर्सिटी जबलपुर में मौजूदा इंजीनियरिंग कॉलेज को अपग्रेड करके स्थापित की जाएगी। इसका नाम ‘महाकौशल प्रौद्योगिकी एवं कौशल विश्वविद्यालय’ रखा जाएगा। इसके अंतर्गत जबलपुर, रीवा, शहडोल और सागर संभाग के जिलों के इंजीनियरिंग कॉलेज शामिल होंगे।
तीसरी यूनिवर्सिटी उज्जैन में इंजीनियरिंग कॉलेज को अपग्रेड करके स्थापित की जाएगी। इसका नाम ‘मालवा प्रौद्योगिकी एवं कौशल विश्वविद्यालय’ होगा। इसके अंतर्गत इंदौर और उज्जैन संभाग के जिलों के इंजीनियरिंग कॉलेज संबद्ध रहेंगे।
वर्तमान में मध्य प्रदेश के 55 जिलों के 585 इंजीनियरिंग कॉलेज RGPV से संबद्ध हैं। इन कॉलेजों में 13 पाठ्यक्रमों के तहत करीब 3 लाख 85 हजार विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। विश्वविद्यालय के पुनर्गठन के बाद संबंधित संभागों और जिलों के कॉलेज तथा विद्यार्थी नई क्षेत्रीय विश्वविद्यालयों से संबद्ध हो जाएंगे। सरकार का तर्क है कि इससे तकनीकी शिक्षा का विकेंद्रीकरण होगा और विद्यार्थियों तथा कॉलेजों के प्रशासनिक एवं शैक्षणिक कामकाज में सुविधा होगी।
मुख्यमंत्री की सलाह पर नई विश्वविद्यालयों के नाम में ‘कौशल’ शब्द भी जोड़ा गया है, ताकि तकनीकी शिक्षा के साथ कौशल विकास पर भी जोर दिया जा सके। कैबिनेट ने इन तीनों विश्वविद्यालयों के लिए पदों के साथ अन्य स्थापना संबंधी मंजूरियां भी दे दी हैं।
RGPV के नाम बदलने और तीन हिस्सों में पुनर्गठन के फैसले को लेकर कांग्रेस ने सरकार पर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस प्रदेश मीडिया प्रभारी मुकेश नायक ने आरोप लगाया कि सरकार को गांधी नाम से आपत्ति है, इसलिए भारत रत्न राजीव गांधी का नाम विश्वविद्यालय से हटाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि केवल नाम बदलने से व्यवस्था नहीं बदलेगी और सरकार को शिक्षा व्यवस्था में मौजूद समस्याओं पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने पेपर लीक जैसी घटनाओं का मुद्दा उठाते हुए सरकार से जवाब मांगा।
तीनों नई विश्वविद्यालयों की स्थापना की प्रक्रिया को पूरा करने के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया गया है। समिति में कौशल विकास, वित्त, उच्च शिक्षा और सामान्य प्रशासन विभाग के प्रतिनिधियों के साथ मौजूदा RGPV के कुलगुरु को शामिल किया गया है। समिति इन ऑटोनॉमस विश्वविद्यालयों की स्थापना से जुड़ी प्रक्रिया पूरी करेगी।
नई विश्वविद्यालयों के लिए अलग-अलग एक्ट लागू किए जाएंगे और उनकी स्थापना के बाद फंडिंग, प्रशासनिक व्यवस्था और वित्तीय प्रबंधन भी अलग-अलग होंगे। अब समिति की प्रक्रिया पूरी होने के बाद तीनों विश्वविद्यालयों की स्थापना और उनके कामकाज को लेकर आगे की तस्वीर स्पष्ट होगी।
एक तरफ सरकार सांस्कृतिक क्षेत्र में ‘श्रीकृष्ण पर्व’ के जरिए स्थानीय कलाकारों और लोक परंपराओं को व्यापक मंच देने की बात कर रही है, तो दूसरी ओर तकनीकी शिक्षा में RGPV के पुनर्गठन के जरिए क्षेत्रीय स्तर पर विश्वविद्यालयों को मजबूत करने की तैयारी है। इन दोनों फैसलों के बीच जहां सरकार विकेंद्रीकरण और नई पीढ़ी को जोड़ने की बात कर रही है, वहीं RGPV के नाम परिवर्तन को लेकर विपक्ष की आपत्ति ने इसे राजनीतिक मुद्दा भी बना दिया है।
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