MP में ‘सुपर सीएम’ कौन? उच्च शिक्षा विभाग के मुखिया बौने, क्या डॉ. सुनील मंदरिया के आगे नतमस्तक है ‘यादव सरकार’?

भोपाल। मध्यप्रदेश की राजनीति और प्रशासनिक हलकों में इन दिनों एक ही सवाल गूंज रहा है— आखिर डॉ. सुनील मंडेरिया पर मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) और ‘सीएम हाउस’ इतना मेहरबान क्यों है? भोज यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार डॉ. सुनील मंडेरिया को लेकर उठ रहे विवाद अब केवल आरोपों तक सीमित नहीं रहे, बल्कि उन्होंने प्रदेश की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति पर ही सवालिया निशान लगा दिया है।

सवाल सीधा है— क्या डॉ. सुनील मंडेरिया का रसूख उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार और विभाग के मुखिया अपर मुख्य सचिव (ACS) अनुपम राजन से भी ऊपर है?

सूत्र बताते हैं कि विभाग के भीतर कई बार मंडेरिया की कार्यप्रणाली को लेकर फाइलें चलीं, लेकिन हर बार ‘अदृश्य हाथों’ ने उन्हें बचा लिया। जब विभाग के सर्वोच्च अधिकारी और खुद मंत्री की मर्जी के बिना एक रजिस्ट्रार अपनी कुर्सी पर अंगद की तरह पैर जमाए बैठा हो, तो यह संकेत साफ है कि पावर सेंटर कहीं और है।

डॉ. मंडेरिया पर भ्रष्टाचार, अनियमितताओं और प्रशासनिक मनमानी के कई गंभीर आरोप लगे हैं। नियम कहते हैं कि इतने गंभीर आरोपों के बाद किसी भी अधिकारी को निष्पक्ष जांच के लिए तत्काल निलंबित (Suspend) कर दिया जाना चाहिए। लेकिन मंडेरिया के मामले में नियम-कायदे शायद बदल जाते हैं।

सवालवर्तमान स्थिति
निलंबन क्यों नहीं?गंभीर आरोपों के बावजूद मंडेरिया अपने पद पर सुरक्षित हैं।
मंत्री की वैल्यू क्या?क्या उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार के निर्देशों की विभाग में अनदेखी हो रही है?
ACS की भूमिका?क्या अपर मुख्य सचिव अनुपम राजन बेबस हैं या उन्हें ऊपर से चुप रहने का आदेश है?
CMO का संरक्षण?चर्चा है कि मंडेरिया को सीधे मुख्यमंत्री कार्यालय से ‘कवच’ प्राप्त है।

ब्रैंडवाणी का तीखा सवाल: क्या मोहन सरकार में भ्रष्ट आचरण के आरोपों से घिरे अधिकारियों को संरक्षण देना अब नई परंपरा बन गई है? अगर नहीं, तो मंडेरिया अब तक पद पर क्यों हैं?

यह केवल एक रजिस्ट्रार के पद का मामला नहीं है, यह डॉ. मोहन यादव की छवि और उनकी सरकार के इकबाल का मामला है। यदि एक रजिस्ट्रार पूरी व्यवस्था, मंत्री और ACS को ठेंगा दिखा रहा है, तो जनता के बीच यह संदेश जा रहा है कि सरकार ‘चुनिंदा’ लोगों के लिए कानून की किताब बंद कर देती है।

अब देखना यह है कि उच्च शिक्षा विभाग इस ‘मंडेरिया मोह’ से कब बाहर आता है या फिर यह विवाद मुख्यमंत्री की साख को और ज्यादा नुकसान पहुँचाता रहेगा।

रिपोर्टर: विशेष संवाददाता, ब्रांडवानी समाचार

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