
भोपाल। मध्य प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में नल-जल योजनाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए नई व्यवस्था लागू की जा रही है। अब गांवों में पानी का कर यानी वाटर टैक्स वसूलने की जिम्मेदारी स्वयं सहायता समूहों को दी जाएगी। इसके बदले समूहों को वसूली गई राशि का 10 से 20 प्रतिशत हिस्सा प्रोत्साहन के रूप में दिया जाएगा। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के अपर मुख्य सचिव सचिन सिन्हा ने इस संबंध में सभी जिला कलेक्टरों को निर्देश जारी किए हैं।
ग्राम पंचायत और स्वयं सहायता समूह के बीच होगा समझौता
विभाग के निर्देश के मुताबिक पानी के कर की वसूली के लिए स्वयं सहायता समूह और संबंधित ग्राम पंचायत के बीच लिखित सहमति पत्र किया जाएगा। वसूली की प्रक्रिया को डिजिटल माध्यम से संचालित करने पर जोर दिया गया है। इसका उद्देश्य कर संग्रह में पारदर्शिता लाना और ग्रामीण नल-जल योजनाओं के संचालन के लिए नियमित आय सुनिश्चित करना है।
सरकार की योजना है कि पानी के कर से मिलने वाली राशि का उपयोग नल-जल योजनाओं के संचालन और रखरखाव में किया जाए। इससे बिजली बिल, पाइपलाइन की मरम्मत और दूसरी जरूरी व्यवस्थाओं के लिए पंचायतों को स्थानीय स्तर पर संसाधन उपलब्ध हो सकेंगे।
प्रदेश में 5 लाख से ज्यादा स्वयं सहायता समूह
मध्य प्रदेश में स्वयं सहायता समूहों का बड़ा नेटवर्क है। विभाग के अनुसार प्रदेश में 5 लाख से अधिक स्वयं सहायता समूह संचालित हैं और इनमें 62 लाख से ज्यादा महिलाएं जुड़ी हुई हैं। सरकार अब इस सामुदायिक नेटवर्क का इस्तेमाल गांवों में पानी के कर की वसूली के लिए करेगी।
इस व्यवस्था से महिला समूहों को स्थानीय स्तर पर अतिरिक्त आय का अवसर मिलने की भी उम्मीद है। साथ ही पंचायतों को नियमित रूप से जल कर संग्रह करने में मदद मिलेगी।
पहले से लागू हैं ग्रामीण जल कर की दरें
मध्य प्रदेश सरकार ने जून 2026 में ग्रामीण नल-जल योजनाओं के संचालन, संधारण और प्रबंधन से जुड़े नए नियम प्रभावी किए थे। इनके तहत अलग-अलग क्षेत्रों में घरेलू कनेक्शन के लिए मासिक जल कर निर्धारित किया गया है। जनजातीय विकासखंड में घरेलू परिवार से 60 रुपये, मास्टर प्लान क्षेत्र की पंचायतों में 120 रुपये और अन्य पंचायतों में 100 रुपये प्रति माह जल कर निर्धारित है।
विद्यालय, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, पंचायत भवन और आंगनबाड़ी केंद्र जैसे सार्वजनिक संस्थानों के लिए 200 रुपये मासिक शुल्क तय है। वहीं गैर-घरेलू संस्थानों के लिए अलग दरें निर्धारित की गई हैं। नए कनेक्शन पर भी निर्धारित जन सहयोग राशि लेने का प्रावधान है।
पानी की बर्बादी पर जुर्माने का भी प्रावधान
नई ग्रामीण जल व्यवस्था में पानी की बर्बादी रोकने के लिए भी नियम बनाए गए हैं। वाहन धोने, मवेशियों को नहलाने, कृषि कार्य में घरेलू नल के पानी का इस्तेमाल करने या सीधे टुल्लू पंप लगाकर पानी खींचने जैसी गतिविधियों पर जुर्माने का प्रावधान है। बार-बार नियम तोड़ने पर कनेक्शन काटने की कार्रवाई भी की जा सकती है।
मध्य प्रदेश में ग्रामीण नल-जल योजनाओं की आर्थिक स्थिरता बढ़ाने के लिए स्वयं सहायता समूहों को वाटर टैक्स वसूली से जोड़ा जा रहा है। समूहों को वसूली के आधार पर 10 से 20 प्रतिशत प्रोत्साहन मिलेगा। इससे पंचायतों की आय बढ़ाने के साथ महिला समूहों की आर्थिक भागीदारी को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
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