
मैहर/ देवेश शर्मा: पूर्व विधायक नारायण त्रिपाठी ने ग्राम पंचायत देवरी के झिर्राहट गांव में आदिवासी परिवारों के सामने उत्पन्न पेयजल संकट को लेकर अल्ट्राटेक उद्योग प्रबंधन पर नाराजगी जताई है। उन्होंने कहा कि जिन ग्रामीणों ने उद्योगों को स्थापित होने में सहयोग दिया, आज उन्हीं लोगों को बुनियादी सुविधाओं से वंचित किया जा रहा है, जो स्वीकार्य नहीं है।
नाले का पानी पीने को मजबूर
पूर्व विधायक ने बताया कि झिर्राहट गांव में करीब 200 से 250 आदिवासी परिवार निवास करते हैं और वे स्वच्छ पेयजल के अभाव में नाले का पानी पीने को मजबूर हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में लोग शुद्ध पेयजल को प्राथमिकता देते हैं, लेकिन आदिवासी परिवारों को ऐसी स्थिति में जीवन यापन करना पड़ रहा है, जो बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।
ग्रामीणों के सामने गंभीर संकट
नारायण त्रिपाठी ने कहा कि क्षेत्र में संचालित सीमेंट उद्योगों द्वारा पहले कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी के तहत गांवों में पेयजल उपलब्ध कराया जाता था, लेकिन यह व्यवस्था बंद होने से ग्रामीणों के सामने गंभीर संकट खड़ा हो गया है।
ये भी पढ़े –https://brandwaani.in/kylian-mbappe-misses-third-world-cup-final-golden-boot-race-continues/
समस्या का शीघ्र समाधान
उन्होंने उद्योग प्रबंधन से तत्काल गांव में पेयजल आपूर्ति बहाल करने की मांग की। इस संबंध में उन्होंने उद्योग के जिम्मेदार अधिकारी श्री मोहंती से भी चर्चा कर समस्या का शीघ्र समाधान करने को कहा।
शोषण किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं
पूर्व विधायक ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि जल्द ही गांव में पानी की व्यवस्था नहीं की गई, तो उद्योग प्रबंधन को स्थानीय लोगों के विरोध का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि जिन ग्रामीणों ने उद्योगों को प्रश्रय दिया, उनका शोषण किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
- narayan-tripathi-protests-drinking-water-crisis-jhirrahat-village










