
दतिया। आदि मिश्रा | दतिया विधानसभा उपचुनाव के लिए भारतीय जनता पार्टी द्वारा प्रत्याशी घोषित किए जाने के बाद जिले की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। भाजपा ने पूर्व मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा की जगह आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार बनाया है। इसके बाद पार्टी के भीतर विरोध के स्वर भी सामने आने लगे हैं।
टिकट की घोषणा के बाद दतिया में बड़ी संख्या में कार्यकर्ता सड़कों पर उतर आए। विरोध प्रदर्शन के बीच जिला संगठन से जुड़े कुछ पदाधिकारियों और बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं के इस्तीफे की भी खबरें सामने आईं। देर रात तक प्रदर्शन और नारेबाजी का दौर चलता रहा। इस दौरान स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा।
राजनीतिक जानकारों के अनुसार, डॉ. नरोत्तम मिश्रा लंबे समय से दतिया की राजनीति का प्रमुख चेहरा रहे हैं। वर्ष 2008 में परिसीमन के बाद डबरा से दतिया आने के बाद उन्होंने लगातार तीन विधानसभा चुनाव जीते और क्षेत्र में मजबूत राजनीतिक आधार बनाया। भाजपा में उन्हें संगठन और सरकार के बीच महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले नेताओं में गिना जाता रहा है।
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टिकट कटने के बाद अब राजनीतिक गलियारों में इस फैसले के पीछे की रणनीति को लेकर चर्चा तेज हो गई है। कुछ राजनीतिक विश्लेषक इसे चुनावी समीकरणों से जोड़कर देख रहे हैं, जबकि नरोत्तम मिश्रा के समर्थक इसे क्षेत्रीय नेतृत्व की अनदेखी बता रहे हैं।
दतिया में यह चर्चा भी है कि डॉ. नरोत्तम मिश्रा का प्रभाव केवल विधानसभा क्षेत्र तक सीमित नहीं रहा, बल्कि प्रदेश में ब्राह्मण समाज के बीच भी उनकी अलग पहचान मानी जाती है। ऐसे में समर्थक इस मुद्दे को ब्राह्मण नेतृत्व से जोड़कर भी देख रहे हैं।
हालांकि भाजपा की ओर से प्रत्याशी चयन को लेकर आधिकारिक रूप से कहा गया है कि यह फैसला चुनावी रणनीति और जीत की संभावनाओं को ध्यान में रखकर लिया गया है। अब दतिया उपचुनाव में यह देखना अहम होगा कि कार्यकर्ताओं की नाराजगी का चुनावी नतीजों पर कितना असर पड़ता है।
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