
टीकमगढ़। राजकुमार शर्मा| जिले के पलेरा क्षेत्र में आजीविका मिशन से जुड़ा एक मामला सामने आया है। आरोप है कि वर्ष 2023 में चार संगम सीएलएफ के नाम पर स्कूटी वितरण दर्ज किया गया था, लेकिन संबंधित लाभार्थियों तक स्कूटी पहुंचने की जानकारी अब तक सामने नहीं आई है। मामले को लेकर स्थानीय स्तर पर योजना के क्रियान्वयन और रिकॉर्ड की जांच की मांग उठ रही है।
2023 में स्कूटी वितरण दर्ज होने का दावा
मामला पलेरा के संगम सीएलएफ आजीविका मिशन से जुड़ा बताया जा रहा है। शिकायतकर्ता दित्यपाल राजपूत के अनुसार, वर्ष 2023 में चार संगम सीएलएफ को स्कूटी वितरण दिखाया गया था। आरोप है कि जिनके लिए यह वितरण किया गया, उन्हें अब तक स्कूटी नहीं मिली।
यदि सरकारी रिकॉर्ड में वितरण दर्ज है और वास्तविक लाभार्थी तक वाहन नहीं पहुंचा है, तो यह जांच का विषय बनता है। इसके लिए संबंधित विभाग के दस्तावेज, वितरण रजिस्टर, वाहन के बिल, पंजीयन और लाभार्थी की जानकारी की जांच जरूरी होगी।
आजीविका मिशन की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
शिकायत में पलेरा आजीविका मिशन के मैनेजर मनोज जैन पर भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं। शिकायतकर्ता ने दावा किया है कि अधिकारी लंबे समय से पदस्थ हैं और उनके कार्यकाल में अनियमितताओं से जुड़ी शिकायतें पहले भी सामने आती रही हैं।
हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। संबंधित अधिकारी और विभाग का पक्ष इस मामले में महत्वपूर्ण है। आरोप सही हैं या नहीं, यह विभागीय जांच और उपलब्ध रिकॉर्ड की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
महिला सशक्तिकरण के दावे पर भी सवाल
आजीविका मिशन का उद्देश्य महिलाओं और स्व-सहायता समूहों को आर्थिक रूप से मजबूत करना है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि क्षेत्र में योजना के वास्तविक लाभ और महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लक्ष्य की समीक्षा की जरूरत है।
शिकायत में स्व-सहायता समूहों और मिड-डे मील से जुड़े समूहों के कामकाज में कथित कमीशनखोरी के भी आरोप लगाए गए हैं। इन आरोपों की भी स्वतंत्र जांच आवश्यक है।
रिकॉर्ड की जांच से सामने आ सकती है वास्तविक स्थिति
मामले में वर्ष 2023 के स्कूटी वितरण से जुड़े दस्तावेजों की जांच सबसे अहम होगी। संबंधित वाहन किसके नाम खरीदे गए, उनका पंजीयन किसके नाम है, भुगतान किस खाते से हुआ और लाभार्थी को वाहन सौंपने का रिकॉर्ड मौजूद है या नहीं, इन बिंदुओं की जांच से स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
स्थानीय स्तर पर संबंधित अधिकारियों से मामले की निष्पक्ष जांच कराने और यदि अनियमितता साबित होती है तो जिम्मेदार लोगों पर नियमानुसार कार्रवाई करने की मांग की जा रही है।
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