
गुना/ मोहित सोनी: भारतीय डाक विभाग के निजीकरण और कर्मचारियों के कथित शोषण के विरोध में भारतीय डाक कर्मचारी महासंघ ने आंदोलन का ऐलान किया है। गुना संभाग में आयोजित बैठक में संघ के पदाधिकारियों ने केंद्र सरकार और विभागीय नीतियों के खिलाफ नाराजगी जताते हुए 20 जुलाई से चरणबद्ध आंदोलन शुरू करने की घोषणा की।
मानसिक और आर्थिक दबाव
असिस्टेंट डिवीजनल प्रेसिडेंट सचेंद्र तिवारी ने बताया कि महासंघ ने 5 जून 2026 को अपनी मांगों का ज्ञापन नई दिल्ली में डाक विभाग के सचिव को सौंपा था। उनका आरोप है कि विदेशी कंपनी मैकेंजी के सुझावों के आधार पर डाक विभाग के निजीकरण की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं, जिससे विभाग की कार्यप्रणाली और कर्मचारियों के हित प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि टारगेट के नाम पर कर्मचारियों पर मानसिक और आर्थिक दबाव बनाया जा रहा है, जिसे कर्मचारी स्वीकार नहीं करेंगे।
हड़ताल शुरू करने की घोषणा
संघ द्वारा घोषित आंदोलन के तहत 20 से 27 जुलाई तक कर्मचारी काली पट्टी बांधकर विरोध दर्ज कराएंगे। 28 जुलाई को लंच अवकाश के दौरान संभागीय कार्यालय पर प्रदर्शन किया जाएगा। 5 अगस्त को एक दिवसीय सांकेतिक हड़ताल होगी, जबकि 18 अगस्त से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू करने की घोषणा की गई है।
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डाक वितरण प्रणाली को फिर से लागू करने की मांग
महासंघ ने अपनी प्रमुख मांगों में रिक्त पदों पर शीघ्र भर्ती, डाक विभाग के निजीकरण पर रोक, टारगेट आधारित कार्यप्रणाली समाप्त करने, रेल डाक सेवा की बहाली, भ्रष्टाचार पर नियंत्रण, कैडर रिस्ट्रक्चरिंग पर रोक तथा पुरानी डाक वितरण प्रणाली को फिर से लागू करने की मांग रखी है।
आंदोलन को सफल बनाने का संकल्प
बैठक में संभागीय सचिव केके भार्गव, गजेंद्र टांडेल, आलोक कटिहार, रमेश साहू, अर्पित श्रीवास्तव, राकेश कुमार, आदर्श रघुवंशी, अभिषेक दुबे, अजय साहू, सुधीर वर्मा, नरेंद्र शर्मा, रवि राव पाटिल, मोहन बंजारा, अमित राठौर, भूपेंद्र रघुवंशी, हरिओम करेले, चेतन सोनकर सहित बड़ी संख्या में डाक कर्मचारी मौजूद रहे। सभी ने आंदोलन को सफल बनाने का संकल्प लिया।
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