
सार
शिक्षक दिवस के अवसर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने नई दिल्ली में आयोजित समारोह में देशभर के शिक्षकों को राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित किया। मध्यप्रदेश के छह शिक्षक एवं शिक्षा क्षेत्र से जुड़े प्रशिक्षक भी इस सम्मान से नवाजे गए। सम्मान पाने वालों में डॉ. अर्चना शुक्ला, शैलेंद्र प्रताप सिंह, संगीता यादव, प्रो. सौरव दत्ता, रीना गुप्ता और ज्योतिबाला राठौर शामिल हैं। इन शिक्षकों को शिक्षा, नवाचार, शोध, कौशल विकास और विद्यार्थियों के लिए किए गए उल्लेखनीय कार्यों के लिए राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान मिला।
विस्तार
भोपाल। शिक्षक दिवस के अवसर पर मध्यप्रदेश के लिए गौरव का क्षण रहा। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 5 सितंबर को नई दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार समारोह में देशभर के चयनित शिक्षकों को सम्मानित किया। इस वर्ष मध्यप्रदेश से छह शिक्षकों और शिक्षा क्षेत्र से जुड़े प्रशिक्षकों को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान मिला।
मध्यप्रदेश के सम्मानित शिक्षकों में डॉ. अर्चना शुक्ला, शैलेंद्र प्रताप सिंह, संगीता यादव, प्रो. सौरव दत्ता, रीना गुप्ता और ज्योतिबाला राठौर शामिल हैं। इनके कार्यों में नवाचार आधारित शिक्षण, पर्यावरण संरक्षण, विद्यार्थियों की सहभागिता, गणित शिक्षा, शोध, डिजिटल कौशल और दिव्यांग प्रशिक्षण जैसे विभिन्न क्षेत्र शामिल हैं।
डॉ. अर्चना शुक्ला ने विज्ञान और जीव विज्ञान शिक्षण के साथ प्रोजेक्ट आधारित सीखने, पर्यावरण संरक्षण और विद्यार्थियों के मार्गदर्शन पर काम किया है। उनके प्रयासों में स्कूल परिसरों में बड़ी संख्या में गौरैया के लिए घोंसले तैयार करना और पेड़ों की डिजिटल मैपिंग के लिए QR कोड जैसी पहल शामिल हैं।
शैलेंद्र प्रताप सिंह ने सीमित संसाधनों वाले स्कूलों में समुदाय की भागीदारी के जरिए शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने का प्रयास किया। उनके प्रयासों से संबंधित स्कूल में विद्यार्थियों के नामांकन और उपस्थिति में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज होने की जानकारी सामने आई है। उन्होंने बाल विवाह रोकने और स्कूल छोड़ चुके बच्चों को दोबारा शिक्षा से जोड़ने की दिशा में भी काम किया।
संगीता यादव को गणित शिक्षण में नवाचार के लिए सम्मानित किया गया। उन्होंने ‘गणितोत्सव’, ‘क्वेस्ट फॉर मैथेमेटिक्स’, ‘मैथेमाइंड’ और ‘बैगलेस मैथमेटिक्स डे’ जैसी पहलों के जरिए विद्यार्थियों के बीच गणित को अधिक रुचिकर बनाने का प्रयास किया। उनके शिक्षण में तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के उपयोग पर भी जोर दिया गया।
प्रो. सौरव दत्ता आईआईएसईआर भोपाल में प्लांट बायोलॉजी के क्षेत्र में शिक्षण और शोध से जुड़े हैं। उन्हें जलवायु परिवर्तन के अनुकूल पौधों के विकास से संबंधित शोध और शिक्षण में योगदान के लिए सम्मानित किया गया। उन्हें इससे पहले आईआईएसईआर भोपाल का विशिष्ट शिक्षक पुरस्कार भी दो बार मिल चुका है।
रीना गुप्ता, शासकीय संभागीय आईटीआई उज्जैन में प्रशिक्षण अधिकारी हैं। उन्होंने श्रवण एवं दृष्टिबाधित प्रशिक्षणार्थियों को कंप्यूटर और डिजिटल कौशल सिखाने के क्षेत्र में लंबे समय तक काम किया है। वहीं ज्योतिबाला राठौर, NSTI (महिला) इंदौर में प्रशिक्षण अधिकारी हैं। उन्होंने प्रशिक्षणार्थियों को राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं के लिए तैयार करने के साथ रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में भी काम किया है।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने समारोह में शिक्षकों की भूमिका को देश के विकास के लिए महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि शिक्षा संविधान में निहित समान अवसर के लक्ष्य को हासिल करने का सबसे प्रभावी माध्यम है। राष्ट्रपति ने प्रारंभिक स्तर पर बच्चों के बौद्धिक, शारीरिक और नैतिक विकास पर ध्यान देने तथा जरूरतमंद और विशेष आवश्यकता वाले विद्यार्थियों में आत्मविश्वास पैदा करने में शिक्षकों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया।
राष्ट्रपति ने शिक्षा के साथ शिक्षण की गुणवत्ता, कौशल विकास और उद्यमिता को भी देश के विकास के लिए महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि भारत को ज्ञान और कौशल के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर मजबूत बनाने में शिक्षकों की भूमिका अहम है।
मध्यप्रदेश के छह शिक्षकों को राष्ट्रीय स्तर पर मिले इस सम्मान को प्रदेश के शिक्षा क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। इनके नवाचार और कार्य अन्य शिक्षकों तथा विद्यार्थियों के लिए भी प्रेरणा का माध्यम बन सकते हैं।
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