
मैड्रिड: स्पेन की राजधानी मैड्रिड में आयोजित आर्चरी तीरंदाजी वर्ल्ड कप के स्टेज 4 में भारत की 17 वर्षीय युवा तीरंदाज पृथिका प्रदीप ने कमाल का प्रदर्शन किया है। शनिवार को उन्होंने सीनियर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी अमिट छाप छोड़ते हुए न सिर्फ व्यक्तिगत वर्ग में कांस्य पदक जीता, बल्कि महिलाओं के कंपाउंड टीम इवेंट में भारत को रजत पदक दिलाने में भी बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
पृथिका प्रदीप ने व्यक्तिगत स्पर्धा में जीता कांस्य
अपने करियर के पहले वर्ल्ड कप पोडियम इवेंट में हिस्सा ले रही पृथिका प्रदीप ने महिलाओं के व्यक्तिगत कंपाउंड वर्ग में देश को गौरवान्वित किया। कांस्य पदक के लिए हुए बेहद रोमांचक मुकाबले में पृथिका ने तुर्किये की मजबूत दावेदार हेजल बुरुन को 145-142 के अंतर से शिकस्त देकर अपना पहला विश्व कप मेडल अपने नाम किया।
इससे पहले, सेमीफाइनल के एक बेहद कड़े मुकाबले में पृथिका को मलेशिया की फातिन नूरफतेह मैट सालेह से 144-142 से मामूली हार का सामना करना पड़ा था, जिसके कारण वह स्वर्ण पदक की रेस (फाइनल) से बाहर हो गई थीं। 17 साल की पृथिका के लिए यह पदक उनके करियर का एक और बड़ा मील का पत्थर है। इससे पहले उन्होंने पिछले साल ढाका में आयोजित एशियन आर्चरी चैंपियनशिप में भी रजत पदक जीता था।
महिला कंपाउंड टीम को मिला रजत पदक
व्यक्तिगत पदक जीतने से पहले, शनिवार को ही पृथिका प्रदीप ने भारत की अनुभवी तीरंदाज ज्योति सुरेखा वेन्नम और चिकिथा तानिपार्थी के साथ मिलकर महिला कंपाउंड टीम स्पर्धा में हिस्सा लिया। भारतीय तिकड़ी ने इस प्रतियोगिता में शानदार खेल दिखाते हुए उपविजेता का स्थान हासिल किया और रजत पदक पर कब्जा जमाया।
स्वर्ण पदक के लिए हुए फाइनल मुकाबले में सातवीं वरीयता प्राप्त भारतीय टीम को टॉप सीड (शीर्ष वरीयता प्राप्त) कोलंबिया की मजबूत टीम से 232-228 से हार का सामना करना पड़ा। कोलंबियाई टीम का प्रतिनिधित्व सारा लोपेज, एलेजांद्रा उस्कियानो और मारियाना रोड्रिगेज जैसी दिग्गज तीरंदाज कर रही थीं।
भारतीय महिला टीम का फाइनल तक का सफर
क्वालीफिकेशन राउंड में 1024 का स्कोर करके सातवीं सीड के रूप में टूर्नामेंट में प्रवेश करने वाली भारतीय महिला टीम ने अपने प्रदर्शन से सबको चौंका दिया। फाइनल तक पहुंचने के अपने सफर में भारतीय तिकड़ी ने डेनमार्क, मेजबान स्पेन और तीसरी वरीयता प्राप्त दक्षिण कोरिया जैसी दिग्गज टीमों को धूल चटाई और अंततः कोलंबिया के खिलाफ रजत पदक पक्का किया।
पुरुष टीम और मिक्स्ड टीम पदक से चूकीं
महिला वर्ग में मिली सफलताओं के बीच, भारत को पुरुषों के कंपाउंड टीम इवेंट में निराशा हाथ लगी और टीम मामूली अंतर से पदक जीतने से चूक गई। भारत की ओर से टॉप सीड साहिल जाधव, गणेश मणि रत्नम थिरुमुरु और कुशल दलाल की टीम कांस्य पदक के मुकाबले में जर्मनी से बेहद कड़े संघर्ष में महज 1 अंक (233-232) से हार गई। इससे पहले सेमीफाइनल में भी भारतीय पुरुष टीम को मेक्सिको के खिलाफ शूट-आउट में हार का सामना करना पड़ा था। इसके अलावा, भारत की मिक्स्ड कंपाउंड टीम का सफर भी क्वार्टर-फाइनल में ही समाप्त हो गया, जहाँ उन्हें भी मेक्सिको के हाथों एक बेहद करीबी शूट-आउट में शिकस्त झेलनी पड़ी।
पुरुषों की व्यक्तिगत स्पर्धा का हाल
पुरुषों की व्यक्तिगत कंपाउंड प्रतियोगिता में भारत की ओर से ऋषभ यादव सबसे सफल खिलाड़ी बनकर उभरे। ऋषभ ने शानदार खेल दिखाते हुए क्वार्टर-फाइनल तक का सफर तय किया। वहीं, टीम के अन्य तीन सदस्यों—साहिल जाधव, गणेश मणि रत्नम थिरुमुरु और कुशल दलाल का सफर उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा और वे तीनों ही तीसरे राउंड में मुकाबला हारकर प्रतियोगिता से बाहर हो गए।
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