सदन में गूंजी शिक्षकों की आवाज: राज्यसभा सांसद डॉ. सुमेर सिंह सोलंकी ने TET की अनिवार्यता का मुद्दा उठाया

नई दिल्ली/बड़वानी: राज्यसभा सांसद डॉ. सुमेर सिंह सोलंकी ने शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) से प्रभावित शिक्षकों का मुद्दा राज्यसभा में जोर-शोर से उठाया। उन्होंने इस विषय को लाखों शिक्षकों के मान-सम्मान और भविष्य की चिंता से जोड़ते हुए इसे महत्वपूर्ण बताया।

सांसद डॉ. सोलंकी के संबोधन में अनुभव का हवाला देते हुए कहा की डॉ. सोलंकी ने कहा, “मैं स्वयं 20 वर्षों तक शिक्षक रहा हूँ, इसलिए शिक्षकों के दर्द और उनकी समस्याओं को बेहतर ढंग से समझता हूँ।

उन्होंने नियमों पर सवाल उठाया की ‘शिक्षा का अधिकार अधिनियम’ (RTE) लागू होने के बाद पात्रता परीक्षा लेना उचित है, लेकिन जो शिक्षक इस नियम के आने से पहले (20-25 वर्षों से) कार्यरत हैं, उन पर इसे थोपना तर्कसंगत नहीं है, इतने वर्षों की सेवा के बाद अनुभवी शिक्षकों से दोबारा पात्रता परीक्षा की मांग करना उनके सम्मान के विरुद्ध है।

डॉ. सोलंकी ने शिक्षा मंत्री से पूछा कि सरकार इन प्रभावित शिक्षकों को राहत देने के लिए क्या ठोस कदम उठा रही है, केंद्रीय शिक्षा मंत्री से मुलाकात
सदन में मुद्दा उठाने के साथ-साथ मध्य प्रदेश के शिक्षकों के एक प्रतिनिधिमंडल ने नई दिल्ली में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से मुलाकात की, प्रतिनिधिमंडल ने ज्ञापन सौंपकर TET की अनिवार्यता से उत्पन्न हो रहे ‘गंभीर मानवीय संकट’ से अवगत कराया, शिक्षकों ने मांग की है कि पुराने और अनुभवी शिक्षकों को इस परीक्षा से छूट दी जाए।

मप्र ट्राईबल वेलफेयर टीचर्स एसोसिएशन ने सांसद डॉ. सोलंकी के प्रयासों की सराहना करते हुए शिक्षक संगठनों ने आभार व्यक्त किया है.
संगठन के पदाधिकारियों ने बताया कि डॉ. सोलंकी ने लगातार दो दिनों तक दिल्ली में शिक्षकों की टीम की मदद की है, वे प्रमुख उपस्थित पदाधिकारी में प्रदेश अध्यक्ष डीके सिंगौर (मंडला), सचिव हेमेंद्र मालवीय, जिला अध्यक्ष कसर सिंह सोलंकी, शैलेंद्र यादव, निलेश भावसार, रवि त्रिपाठी और राजेश जोशी शामिल रहे।

डॉ. सोलंकी के इस प्रयास ने शिक्षकों के मुद्दों को नई दिशा दी है और उम्मीद है कि सरकार इस दिशा में सकारात्मक कदम उठाएगी।

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