
सार
1987 में जब रामानंद सागर की ‘रामायण’ टीवी पर आई, तो इसके किरदारों के साथ इसका टाइटल गीत भी लोगों की जुबान पर चढ़ गया। ‘मंगल भवन अमंगल हारी’ की पंक्तियां तुलसीदास की रामचरितमानस से ली गई थीं, जबकि इसे टीवी सीरियल के लिए संगीतकार रविंद्र जैन ने अपनी धुन और संगीत से खास पहचान दी। आज भी इस गीत को सुनते ही लोगों को दूरदर्शन की वही लोकप्रिय ‘रामायण’ याद आ जाती है।
विस्तार
‘रामायण’ शुरू होते ही गूंजती थी ये आवाज
रामानंद सागर की ‘रामायण’ भारतीय टेलीविजन के इतिहास के सबसे चर्चित धारावाहिकों में गिनी जाती है। इसका प्रसारण 1987 से 1988 के बीच दूरदर्शन के डीडी नेशनल पर हुआ था। धारावाहिक में अरुण गोविल ने भगवान राम और दीपिका चिखलिया ने माता सीता की भूमिका निभाई थी।
सीरियल की कहानी और किरदारों के साथ इसका संगीत भी दर्शकों के बीच खासा लोकप्रिय हुआ। ‘मंगल भवन अमंगल हारी’ से शुरू होने वाला गीत रामायण की पहचान बन गया।
तुलसीदास की चौपाई से बना गीत
‘मंगल भवन अमंगल हारी’ की पंक्तियां गोस्वामी तुलसीदास की रचना रामचरितमानस से जुड़ी हैं। रामचरितमानस में भगवान राम के चरित्र और उनके जीवन प्रसंगों का वर्णन किया गया है।
रामानंद सागर की रामायण के लिए इस पारंपरिक धार्मिक सामग्री को टीवी के माध्यम के मुताबिक संगीतबद्ध किया गया। यही वजह रही कि गीत धार्मिक भाव के साथ-साथ बेहद सहज और याद रह जाने वाला बन गया।
रविंद्र जैन ने दी खास धुन
रामायण के संगीत को लोकप्रिय बनाने में संगीतकार रविंद्र जैन की अहम भूमिका रही। उपलब्ध स्रोतों के मुताबिक सीरियल के संगीत की रचना रविंद्र जैन ने की थी।
उन्होंने धार्मिक भाव को ध्यान में रखते हुए ऐसी धुन तैयार की, जो गंभीर होने के साथ-साथ आम दर्शकों के लिए भी आसानी से जुड़ने वाली थी। गीत के शब्दों और धुन का यह मेल इतना प्रभावी रहा कि रामायण के प्रसारण के दशकों बाद भी यह लोगों की यादों में बना हुआ है।
घर-घर में बन गई थी पहचान
1987 की रामायण केवल एक टीवी शो नहीं रही। इसके प्रसारण के समय देशभर में लोग रविवार की सुबह इसके लिए इंतजार करते थे। कई जगहों पर लोग टीवी के सामने बैठकर धारावाहिक देखते थे और इसके किरदारों को लेकर दर्शकों में गहरी भावनात्मक जुड़ाव की बात कही गई है।
ऐसे माहौल में ‘मंगल भवन अमंगल हारी’ जैसे भक्ति गीत ने धारावाहिक के भावनात्मक असर को और मजबूत किया। गीत की शुरुआती पंक्तियां सुनते ही दर्शकों को रामायण की दुनिया में प्रवेश करने जैसा अनुभव होता था।
आज भी सुनते ही याद आती है पुरानी रामायण
रामानंद सागर की रामायण का दौर भले ही कई दशक पुराना हो चुका है, लेकिन इसके गीत और संवाद आज भी लोगों की यादों में हैं। 2020 में लॉकडाउन के दौरान जब रामायण का दोबारा प्रसारण हुआ, तब भी इस धारावाहिक ने बड़े पैमाने पर दर्शक जुटाए और इसकी लोकप्रियता एक बार फिर चर्चा में आई।
यही वजह है कि ‘मंगल भवन अमंगल हारी’ सिर्फ एक टीवी टाइटल गीत नहीं, बल्कि उस दौर की रामायण से जुड़ी यादों का हिस्सा बन चुका है। तुलसीदास की चौपाई और रविंद्र जैन की धुन के इस मेल ने इसे ऐसा गीत बना दिया, जिसकी गूंज आज भी बरकरार है।
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