
मध्यप्रदेश की राजनीति में ‘अपनों’ से ही जूझ रही भाजपा के लिए अब एक नया सिरदर्द पैदा हो गया है। मामला जुड़ा है मैहर जिले के कद्दावर नेता और पूर्व राज्यमंत्री रामखेलावन पटेल से। विंध्य की राजनीति में खुद को स्थापित बताने वाले पटेल आजकल अपनी ही सरकार के लिए ‘विकास का कांटा’ बनते जा रहे हैं। अमरपाटन से लेकर मैहर तक, गलियारों में चर्चा आम है कि क्या रामखेलावन पटेल अब पार्टी लाइन से ऊपर होकर केवल विरोध की राजनीति कर रहे हैं?
डॉ. मोहन यादव की सरकार प्रदेश में राजस्व वृद्धि और बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए दिन-रात जुटी है। मैहर क्षेत्र में माइनिंग से मिलने वाले राजस्व, नई सड़कों के जाल और शिक्षा के मंदिरों (स्कूलों) के कायाकल्प के लिए करोड़ों के प्रोजेक्ट्स पर काम चल रहा है। लेकिन आश्चर्य की बात यह है कि इन तमाम विकास कार्यों के सामने कोई विपक्षी दल नहीं, बल्कि भाजपा के अपने ही पूर्व मंत्री रामखेलावन पटेल ‘धरना बहादुर’ बनकर खड़े हो जाते हैं।
क्या एक पूर्व मंत्री का अपनी ही सरकार के फैसलों के खिलाफ सड़कों पर बैठना अनुशासनहीनता नहीं है? या फिर इन विरोध प्रदर्शनों के पीछे भ्रष्टाचार की कोई ऐसी कहानी छिपी है, जिसका खुलासा होने के डर से वे दबाव की राजनीति कर रहे हैं?
सूत्रों की मानें तो रामखेलावन पटेल का यह रवैया केवल जनता की भलाई के लिए नहीं, बल्कि अपने व्यक्तिगत हितों और वर्चस्व को बचाए रखने की एक कवायद है। जानकारों का कहना है कि:
- माइनिंग राजस्व में अड़ंगा: माइनिंग से मिलने वाले लीगल रेवेन्यू के कार्यों में बाधा डालना सरकार की तिजोरी को नुकसान पहुँचाने जैसा है।
- सड़क और स्कूल निर्माण: जनकल्याणकारी योजनाओं पर धरने देना यह दर्शाता है कि उन्हें विकास से ज्यादा अपनी ‘सियासी दुकान’ चलाने की चिंता है।
- मोहन सरकार को चुनौती: सरेआम धरने पर बैठकर वे यह संदेश देने की कोशिश कर रहे हैं कि मैहर में सरकार नहीं, बल्कि उनका सिक्का चलता है।
अब गेंद भाजपा संगठन और मुख्यमंत्री मोहन यादव के पाले में है। सियासी गलियारों में यह सवाल गूँज रहा है कि क्या भाजपा नेतृत्व अपने ही इस ‘बागी’ तेवर वाले नेता के सामने घुटने टेकेगा या फिर अनुशासन का डंडा चलाकर उन्हें ‘ठिकाने’ लगाया जाएगा?
अनुशासन की दुहाई देने वाली भारतीय जनता पार्टी के लिए रामखेलावन पटेल एक ऐसी फांस बन चुके हैं जिसे न निगला जा रहा है और न उगला। अगर जल्द ही इन पर लगाम नहीं कसी गई, तो मैहर और अमरपाटन का विकास केवल धरनों की भेंट चढ़ जाएगा।
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