
मंत्रालय के गलियारों में एक बड़े विभाग के रिटायर्ड इंजीनियर की संविदा नियुक्ति इन दिनों चर्चा का विषय बनी हुई है। चर्चा इसलिए नहीं कि उन्हें दोबारा जिम्मेदारी मिली, बल्कि इसलिए कि नियुक्ति की प्रक्रिया को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं।
बताया जा रहा है कि सरकार ने इंजीनियर साहब को छह महीने के लिए फिर संविदा पर जिम्मेदारी सौंपी है। वहीं, विभागीय नियमों को लेकर चर्चा है कि दो बार से अधिक या 65 वर्ष की आयु के बाद संविदा नियुक्ति को लेकर प्रावधान स्पष्ट नहीं हैं। ऐसे में इस नियुक्ति को लेकर मंत्रालय में तरह-तरह की बातें हो रही हैं।
प्रस्ताव से मंजूरी तक अपनी ही पैरवी?
मंत्रालय के गलियारों में चर्चा है कि इंजीनियर साहब की संविदा नियुक्ति का प्रस्ताव तैयार कराने से लेकर फाइल आगे बढ़ाने तक उनकी भूमिका काफी अहम रही। यहां तक कहा जा रहा है कि फाइल मुख्यमंत्री कार्यालय तक पहुंची और वहां से मंजूरी मिलने के बाद नियुक्ति आदेश जारी कर दिए गए।
हालांकि, इस दावे की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। नियुक्ति की वास्तविक प्रक्रिया और उसमें लागू नियम क्या रहे, यह संबंधित विभाग के आदेश और रिकॉर्ड सामने आने के बाद ही स्पष्ट होगा।
यह भी पढ़े: IPS अधिकारी के पति के संविलियन पर सवाल, 16 साल की सेवा प्रभावित होने का दावा
नियम या जरूरत के हिसाब से अपवाद?
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर संविदा नियुक्ति के लिए निर्धारित नियमों में आयु या कार्यकाल की सीमा है, तो इस मामले में किस प्रावधान के तहत नियुक्ति दी गई? और अगर कोई विशेष छूट दी गई है, तो उसका आधार क्या है?
मंत्रालय में चर्चा का बाजार गर्म है। कुछ लोग इसे प्रशासनिक जरूरत बता रहे हैं, तो कुछ सवाल उठा रहे हैं कि क्या नियमों से अलग हटकर किसी व्यक्ति विशेष के लिए रास्ता बनाया गया?
फिलहाल नियुक्ति आदेश और उससे जुड़ी फाइल के आधिकारिक विवरण सामने आने का इंतजार है। दस्तावेज सामने आने के बाद ही यह साफ हो सकेगा कि मामला नियमों के तहत हुआ या किसी विशेष प्रावधान के आधार पर अपवाद बनाया गया।
यह भी पढ़े: जज साहब की जांच का नहीं दिख रहा ‘द एंड’! छह साल बाद भी जांच अधूरी
- retired-engineer-contract-appointment-rules-madhya-pradesh-government-file-controversy








