
सार:
रीवा/ अरविंद तिवारी: रीवा के शासकीय गांधी मेमोरियल हॉस्पिटल में प्रसव के लिए भर्ती महिला और उसके गर्भस्थ शिशु की उपचार के दौरान मौत के मामले में कार्रवाई का दायरा बढ़ गया है। पहले दो नर्सिंग ऑफिसरों को निलंबित किया गया था। अब ड्यूटी डॉक्टर डॉ. सोनल अग्रवाल और निश्चेतना विभाग की डॉ. निधि पांडे को भी तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल के निर्देश पर मामले की जांच जारी है।
विस्तार:
रीवा के शासकीय गांधी मेमोरियल हॉस्पिटल में उपचार के दौरान महिला और उसके गर्भस्थ शिशु की मौत का मामला लगातार गंभीर होता जा रहा है। घटना के बाद परिजनों की ओर से लगाए गए आरोपों और अस्पताल की व्यवस्थाओं को लेकर उठे सवालों के बीच अब दो डॉक्टरों के खिलाफ भी बड़ी कार्रवाई की गई है। अस्पताल प्रबंधन ने ड्यूटी डॉक्टर डॉ. सोनल अग्रवाल और निश्चेतना विभाग की डॉ. निधि पांडे को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।
इससे पहले इसी मामले में दो नर्सिंग ऑफिसरों को निलंबित किया जा चुका है। ऐसे में अब एक ही घटना के सिलसिले में चार स्वास्थ्यकर्मियों पर कार्रवाई हो चुकी है। हालांकि, मामले में अंतिम जिम्मेदारी जांच पूरी होने के बाद ही तय होगी।
जानकारी के अनुसार, 26 अगस्त को कल्पना मिश्रा को प्रसव के लिए शासकीय गांधी मेमोरियल हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। उपचार के दौरान उनकी और उनके गर्भस्थ शिशु की मौत हो गई। घटना की जानकारी सामने आने के बाद परिवार के लोगों ने अस्पताल में हंगामा किया।
परिजनों ने उपचार में लापरवाही के आरोप लगाए। इसके साथ ही अस्पताल के कर्मचारियों के व्यवहार को लेकर भी शिकायत की गई। परिवार की ओर से लगाए गए आरोपों के बाद मामला गंभीर हो गया और अस्पताल प्रबंधन तथा प्रशासन की भूमिका भी सवालों के घेरे में आ गई।
घटना को गंभीरता से लेते हुए मामले की जांच के लिए समिति गठित की गई। जांच में उपचार के दौरान अपनाई गई प्रक्रिया, संबंधित स्वास्थ्यकर्मियों की भूमिका और मरीज को उपलब्ध कराई गई चिकित्सा सुविधाओं समेत अलग-अलग पहलुओं की जांच की जा रही है।
प्रथम दृष्टया सामने आए तथ्यों और प्राप्त शिकायतों के आधार पर पहले दो नर्सिंग ऑफिसरों को निलंबित किया गया। इसके बाद जांच का दायरा आगे बढ़ाया गया और अब ड्यूटी डॉक्टर तथा निश्चेतना विभाग की डॉक्टर के खिलाफ भी निलंबन की कार्रवाई की गई है।
मामले में ड्यूटी पर तैनात डॉ. सोनल अग्रवाल और निश्चेतना विभाग की डॉ. निधि पांडे को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है। दोनों डॉक्टरों की भूमिका को लेकर जांच की जा रही है।
डॉक्टरों पर हुई कार्रवाई के बाद अस्पताल प्रबंधन की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल और गंभीर हो गए हैं। हालांकि, निलंबन की कार्रवाई को अंतिम रूप से दोष सिद्ध होना नहीं माना जा सकता। जांच समिति की रिपोर्ट सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि घटना में किस स्तर पर लापरवाही हुई और इसके लिए कौन जिम्मेदार है।
मामले को लेकर मध्यप्रदेश के उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने भी गंभीरता दिखाई है। उनके निर्देश के बाद जांच समिति गठित की गई। उन्होंने स्पष्ट किया है कि मरीजों के उपचार में निर्धारित मेडिकल प्रोटोकॉल का पालन हर स्थिति में किया जाना चाहिए।
उपमुख्यमंत्री ने यह भी कहा है कि मरीजों के साथ-साथ उनके परिजनों के साथ संवेदनशील व्यवहार भी स्वास्थ्य सेवाओं का महत्वपूर्ण हिस्सा है। अस्पताल में इलाज के दौरान किसी भी परिवार को अनावश्यक परेशानी न हो और उन्हें उचित जानकारी मिलती रहे, यह सुनिश्चित किया जाना जरूरी है।
फिलहाल मामले की जांच जारी है। जांच समिति घटना से जुड़े तथ्यों को सामने लाने का प्रयास कर रही है। उपचार के दौरान क्या प्रक्रिया अपनाई गई, किस समय कौन-सा उपचार दिया गया और ड्यूटी पर मौजूद स्वास्थ्यकर्मियों की क्या भूमिका रही, इन सभी पहलुओं की जांच की जा रही है।
जांच रिपोर्ट आने के बाद यदि किसी भी डॉक्टर, नर्सिंग स्टाफ या अन्य कर्मचारी की लापरवाही सामने आती है तो उसके खिलाफ नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन ने भी संकेत दिया है कि मामले में दोषियों को किसी भी स्थिति में बख्शा नहीं जाएगा।
इस घटना के बाद गांधी मेमोरियल हॉस्पिटल की व्यवस्थाओं को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। सरकारी अस्पताल में बड़ी संख्या में मरीज उपचार के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में गंभीर स्थिति वाले मरीजों के लिए समय पर चिकित्सा सुविधा, विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता और आपातकालीन व्यवस्थाएं बेहद महत्वपूर्ण होती हैं।
परिजनों के आरोपों के बाद अब यह भी देखना होगा कि घटना के समय अस्पताल में उपचार की व्यवस्था किस तरह संचालित हो रही थी और मरीज की स्थिति बिगड़ने पर क्या निर्धारित प्रक्रिया का पालन किया गया था।
उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने मरीजों के उपचार के साथ उनके परिजनों के साथ संवेदनशील व्यवहार को भी प्राथमिकता देने की बात कही है। अस्पताल में इलाज कराने आने वाले परिवार पहले से ही मानसिक तनाव में होते हैं। ऐसे में उन्हें मरीज की स्थिति और उपचार के बारे में स्पष्ट जानकारी मिलना जरूरी है।
अगर किसी परिवार को उपचार प्रक्रिया या मरीज की स्थिति को लेकर कोई शिकायत है तो उसे सुनना और उचित जवाब देना अस्पताल प्रशासन की जिम्मेदारी है। इसी पहलू को लेकर भी इस मामले में शिकायतें सामने आई हैं।
अब तक मामले में दो नर्सिंग ऑफिसरों और दो डॉक्टरों को निलंबित किया जा चुका है। इससे साफ है कि प्रशासन घटना को गंभीरता से ले रहा है। हालांकि, अभी जांच पूरी नहीं हुई है और अंतिम निष्कर्ष सामने आना बाकी है।
परिजनों की शिकायत, अस्पताल के रिकॉर्ड और उपचार से जुड़े तथ्यों के आधार पर जांच समिति अपनी रिपोर्ट तैयार करेगी। रिपोर्ट आने के बाद ही यह तय होगा कि घटना के पीछे वास्तविक कारण क्या था और किन लोगों की जिम्मेदारी बनती है।
फिलहाल रीवा के गांधी मेमोरियल हॉस्पिटल में हुई इस घटना ने सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था और मरीजों की सुरक्षा को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रशासन की ओर से की गई कार्रवाई के बाद अब लोगों की नजर जांच समिति की रिपोर्ट पर है। उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने भी स्पष्ट किया है कि जांच में जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी।
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