
वाशिंगटन डीसी: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के महासचिव दत्तात्रेय होसबाले ने अमेरिका के वाशिंगटन डीसी में शुक्रवार को एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया जिसमें प्रकृति, मानवता और वैश्विक एकता पर अपने विचार रखे।अपने शोध में उन्होंने कहा कि यदि मानव प्रकृति की केवल अपनी आवश्यकता है और लालच की पूर्ति का साधन है, तो शोषण की प्रवृत्ति पैदा होती है।
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इसके विपरीत, यदि यह समझ विकसित की जाए कि संपूर्ण जीव-जगत एक ही ऊर्जा स्रोत से जुड़ा है, तो समाज में एकता सम्मान और संतुलन की भावना विकसित होती है।उन्होंने भारतीय दर्शन का उल्लेख करते हुए कहा कि यह परंपरा हर जीव-मनुष्य, पशु, वृक्ष-पौधों को समान दृष्टि से देखने की शिक्षा देती है। इस ‘एकत्व’ की अवधारणा से न केवल मनुष्य-मनुष्य के बीच बल्कि प्रकृति के साथ-साथ भी सांस्कृतिक संबंध स्थापित होते हैं।
होसबोले ने आगे कहा कि आधुनिक विकास के साथ मुद्रा का संतुलन आवश्यक है। उन्होंने कहा कि केवल भौतिक प्रगति पर आधारित सोच, समाज में ही जन्म लिया जा सकता है, जबकि भारतीय दृष्टिकोण में प्रकृति को ‘माता’ की आवश्यकता होती है और लालच के बीच अंतर करने की सीख मिलती है।इस दौरान एक कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें उन्होंने भारत की सभ्यतागत सोच, वैश्विक भूमिका और सतत विकास के दृष्टिकोण पर भी विस्तार से चर्चा की।
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