
सागर/ मनीष कुमार चौबे: जिले में मातृ मृत्यु दर MMR और शिशु मृत्यु दर IMR को न्यूनतम स्तर पर लाने के लिए प्रशासन ने अभियान तेज कर दिया है। कलेक्टर प्रतिभा पाल स्वयं ब्लॉक स्तर पर आयोजित प्रशिक्षण एवं उन्मुखीकरण कार्यक्रमों में शामिल होकर स्वास्थ्य विभाग के मैदानी अमले को दिशा-निर्देश दे रही हैं। उन्होंने स्पष्ट कहा कि जच्चा और बच्चा की सुरक्षा से किसी भी स्तर पर समझौता नहीं किया जाएगा।
सीधी जवाबदेही तय कर सख्त कार्रवाई
गुरुवार को बंडा और शाहगढ़ ब्लॉक में आशा कार्यकर्ता, एएनएम, सीएचओ सहित मैदानी स्वास्थ्य अमले के लिए विशेष उन्मुखीकरण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान कलेक्टर ने चेतावनी दी कि प्रशिक्षण के बाद भी यदि कार्य में लापरवाही या चूक पाई गई तो संबंधित अधिकारी और कर्मचारी की सीधी जवाबदेही तय कर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
जांच और प्रसव के बाद नवजात की देखभाल
कलेक्टर प्रतिभा पाल ने कहा कि आशा कार्यकर्ता स्वास्थ्य तंत्र की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी हैं। उनका कार्य नवविवाहित योग्य दंपतियों की पहचान से शुरू होकर गर्भावस्था के पहले 12 सप्ताह के भीतर पंजीयन, एएनसी जांच और प्रसव के बाद नवजात की देखभाल तक लगातार जारी रहता है।
महिलाओं की प्राथमिक स्वास्थ्य जांच
उन्होंने निर्देश दिए कि सभी स्वास्थ्य कर्मी जमीनी स्तर पर सही आंकड़े एकत्र करें और उन्हें समय पर पोर्टल पर दर्ज करें। डेटा एंट्री में किसी प्रकार की लापरवाही या गलत जानकारी स्वीकार नहीं की जाएगी। गर्भवती महिलाओं की प्राथमिक स्वास्थ्य जांच पूरी गंभीरता और पर्याप्त समय देकर की जाए।
अस्पताल और आवश्यक व्यवस्थाओं की जानकारी पहले
कलेक्टर ने चिकित्सकों को निर्देशित किया कि अस्पतालों की ओपीडी और आईपीडी में आने वाली सभी गर्भवती महिलाओं की 100 प्रतिशत ब्लड सैंपलिंग कर हीमोग्लोबिन जांच सुनिश्चित की जाए। साथ ही अगले छह महीनों के लिए उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं की बर्थ मैपिंग तैयार की जाए, ताकि प्रसव की संभावित तिथि, अस्पताल और आवश्यक व्यवस्थाओं की जानकारी पहले से महिला, उसके परिवार और संबंधित स्वास्थ्य संस्थान को उपलब्ध रहे।
वास्तविक स्थिति की निगरानी करने के निर्देश
उन्होंने टीकाकरण के लंबित मामलों को शून्य करने, एएनएम द्वारा निर्धारित दिनों में नियमित सेवाएं देने तथा बीएमओ और संबंधित अधिकारियों को प्रतिदिन पोर्टल की समीक्षा कर वास्तविक स्थिति की निगरानी करने के निर्देश भी दिए।
समय पर गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं
कलेक्टर ने कहा कि आंकड़ों के अनुसार मातृ मृत्यु का सबसे अधिक खतरा प्रसव के समय और शिशु मृत्यु का जोखिम जन्म के शुरुआती दिनों में होता है। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग का प्रत्येक कर्मचारी पूरी संवेदनशीलता और जिम्मेदारी के साथ कार्य करे ताकि प्रत्येक गर्भवती महिला और नवजात को समय पर गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें।
कार्यक्रम में जिला पंचायत सीईओ विवेक केवी, एसडीएम आरती यादव, सीएमएचओ डॉ. देवेश पटेरिया सहित स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित रहे।
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