
सीहोर/ नफीस ख़ान: खरीफ सीजन के बीच सीहोर जिले के भैरूंदा, इछावर और रेहटी क्षेत्र में खाद की कालाबाजारी के आरोपों ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। किसानों का दावा है कि सरकार द्वारा तय दरों पर यूरिया और डीएपी उपलब्ध नहीं कराया जा रहा, जबकि कई दुकानों पर इन्हें निर्धारित कीमत से कई गुना अधिक दाम पर बेचा जा रहा है। किसानों ने प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग की है।
सरकारी रेट से कई गुना महंगी बिक रही खाद
किसानों के अनुसार शासन ने यूरिया की एक बोरी की कीमत 266.50 रुपये तय की है, लेकिन इछावर-लाड़कुई सहित कई ग्रामीण क्षेत्रों में यही बोरी 600 से 900 रुपये तक में बेची जा रही है। वहीं DAP, जिसकी निर्धारित कीमत करीब 1350 रुपये है, वह किसानों को 1800 से 2000 रुपये तक में मिल रही है। किसानों का आरोप है कि अधिक कीमत देने पर ही खाद उपलब्ध कराई जा रही है।
मजबूरी में महंगे दाम पर खरीद रहे किसान
खरीफ फसलों के लिए इस समय खाद की सबसे अधिक जरूरत है। किसानों का कहना है कि समय पर खाद नहीं मिलने से फसल प्रभावित होने का खतरा है, इसलिए वे मजबूरी में ऊंचे दाम चुकाकर खाद खरीद रहे हैं। कई किसानों ने आरोप लगाया कि दुकानदार निर्धारित मूल्य पर खाद देने से साफ इनकार कर रहे हैं।
दुकानदारों की मिलीभगत के आरोप
किसान नेता शंकर जाट का आरोप है कि लाड़कुई, इछावर और रेहटी क्षेत्र के कई खाद विक्रेता आपस में मिलकर मनमाने दाम वसूल रहे हैं। किसान स्वराज संगठन ने 2 जुलाई को प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर जांच और कार्रवाई की मांग भी की थी, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
पिछले साल नकली खाद का मामला भी आया था सामने
किसानों ने याद दिलाया कि पिछले वर्ष ग्राम नीमोटा में नकली खाद का बड़ा मामला सामने आया था, जहां राजस्व और कृषि विभाग ने करीब 200 कट्टे जब्त किए थे। एफआईआर दर्ज होने के बावजूद आरोपियों पर प्रभावी कार्रवाई नहीं होने से कालाबाजारी करने वालों के हौसले बढ़े हैं।
निरीक्षण और कार्रवाई की मांग
किसानों का कहना है कि जिले में खाद और बीज के पंजीकृत विक्रेताओं की संख्या पर्याप्त होने के बावजूद उचित मूल्य पर खाद उपलब्ध नहीं हो रही है। उन्होंने प्रशासन से विशेष जांच दल बनाकर औचक निरीक्षण, स्टॉक और बिक्री रजिस्टर की जांच कराने तथा दोषी विक्रेताओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
आंदोलन करने के लिए मजबूर
किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही कालाबाजारी पर रोक नहीं लगी और उचित मूल्य पर खाद उपलब्ध नहीं कराई गई तो वे आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे।
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