
सीहोर। सीहोर जिले के कोसमी गांव में वन विकास निगम की कार्रवाई से प्रभावित आदिवासी परिवारों का विरोध आखिरकार मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के आश्वासन के बाद थम गया। भोपाल की ओर पैदल मार्च कर रहे आदिवासियों को अब सिंहपुर गांव में जमीन के पट्टे देने का भरोसा दिया गया है। साथ ही वन विकास निगम के अधिकारियों की कार्रवाई की उच्चस्तरीय जांच कराने का आश्वासन भी मुख्यमंत्री ने दिया है।
शिवराज के नेतृत्व में मुख्यमंत्री से मिला 16 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल
गुरुवार देर रात केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में 16 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल मुख्यमंत्री निवास पहुंचा। प्रतिनिधिमंडल में भिलाला, बरेला, कोरकू और गोंड समाज सहित विभिन्न आदिवासी समुदायों के प्रतिनिधि शामिल थे। बैठक में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल और आदिवासी वित्त विकास निगम की अध्यक्ष निर्मला बरेला भी मौजूद रहीं।
प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात से पहले मुख्यमंत्री मोहन यादव और शिवराज सिंह चौहान के बीच करीब एक घंटे तक बंद कमरे में चर्चा हुई। इसके बाद आदिवासी प्रतिनिधियों से बातचीत हुई। प्रभावित परिवारों ने मकान तोड़े जाने, फसल के नुकसान और कार्रवाई के दौरान अधिकारियों के कथित व्यवहार का मुद्दा उठाया। मुख्यमंत्री ने मामले की जांच का भरोसा दिया।
5 हजार से ज्यादा आदिवासियों ने शुरू किया था भोपाल मार्च
कोसमी में 11 अक्टूबर को वन विकास निगम की कार्रवाई के दौरान 12 परिवारों के मकान तोड़े गए थे। प्रभावित परिवारों ने कार्रवाई के विरोध में कई दिनों तक धरना दिया। जब स्थानीय स्तर पर समाधान नहीं निकला तो बड़ी संख्या में आदिवासियों ने भोपाल की ओर पैदल मार्च शुरू कर दिया।
आंदोलन से जुड़े लोगों के अनुसार, खेओनी अभयारण्य क्षेत्र के 35 से अधिक गांवों के लोग इस मार्च में शामिल थे। प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगों में जमीन के पट्टे, टूटे मकानों और नष्ट हुई फसलों का मुआवजा तथा कार्रवाई के लिए जिम्मेदार अधिकारियों-कर्मचारियों पर कार्रवाई शामिल थी।
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वन विकास निगम की कार्रवाई पर भी उठे सवाल
इस पूरे विवाद में एक तरफ प्रभावित आदिवासी परिवार कार्रवाई को अन्याय बता रहे हैं, वहीं दूसरी ओर वन विकास निगम और प्रशासन की रिपोर्ट में वन भूमि पर अतिक्रमण तथा पेड़ों को नुकसान पहुंचाने के दावे किए गए हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2021 में संबंधित क्षेत्र में सागौन के पौधे लगाए गए थे और बाद की जांच में बड़ी संख्या में पौधे काटे जाने तथा आरक्षित वन क्षेत्र की जमीन पर अतिक्रमण का उल्लेख किया गया। ऐसे में मुख्यमंत्री द्वारा घोषित जांच को दोनों पक्षों के दावों और कार्रवाई की परिस्थितियों की निष्पक्ष पड़ताल के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
आश्वासन के बाद स्थगित हुआ भोपाल कूच
मुख्यमंत्री के आश्वासन की जानकारी मिलने के बाद बुधनी विधायक रमाकांत भार्गव और अन्य भाजपा नेताओं ने प्रदर्शनकारियों से बातचीत की। इसके बाद आदिवासियों ने भोपाल की ओर अपनी पदयात्रा स्थगित करने का फैसला लिया। प्रशासन ने उनकी सुरक्षित घर वापसी के लिए बसों की व्यवस्था भी की।
हालांकि आंदोलन फिलहाल स्थगित हो गया है, लेकिन प्रभावित परिवारों को जमीन के पट्टे कब मिलेंगे, मकान और फसल के नुकसान का मुआवजा कैसे मिलेगा और जांच में यदि किसी अधिकारी की जिम्मेदारी तय होती है तो उसके खिलाफ क्या कार्रवाई होगी, इन सवालों पर अब सरकार के अगले कदम पर नजर रहेगी।
कोसमी विवाद ने वन भूमि, आदिवासी परिवारों के अधिकार और प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर बड़ा राजनीतिक मुद्दा खड़ा कर दिया था। शिवराज सिंह चौहान के हस्तक्षेप और मुख्यमंत्री मोहन यादव के आश्वासन के बाद फिलहाल आंदोलन शांत हुआ है। अब असली परीक्षा सरकार के उस आश्वासन को जमीन पर लागू करने की होगी।
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