
शिवपुरी।कुलदीप शर्मा| मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर बेंच ने शिवपुरी जिले में नाबालिग लड़की से जुड़े मामले में पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर नाराजगी जताई है। 10 अगस्त 2026 की सुनवाई में कोर्ट ने शिवपुरी एसपी यांगचेन डोलकर भूटिया को कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब मांगा। कोर्ट ने पूछा कि शिकायत मिलने के बावजूद FIR क्यों दर्ज नहीं की गई और नाबालिग को लड़के के साथ रहने की अनुमति किस आधार पर दी गई।
मां ने 11 जुलाई को दर्ज कराई थी शिकायत
मामला खनियाधाना थाना क्षेत्र का बताया गया है। याचिकाकर्ता मां के अनुसार, उसने 11 जुलाई को अपनी नाबालिग बेटी के लापता होने की शिकायत पुलिस से की थी। शिकायत में बताया गया था कि लड़की को भूरा नामक युवक अपने साथ ले गया है और वह उसके परिवार के घर पर मौजूद है।
मां के मुताबिक, जब वह मार्कशीट और आधार कार्ड लेकर थाने पहुंची तो बेटी वहां संबंधित युवक और उसके परिवार के साथ मिली। मां ने बेटी को अपने साथ ले जाने की मांग की, लेकिन आरोप है कि पुलिस ने यह कहते हुए उसे कस्टडी में देने से इनकार कर दिया कि लड़की युवक के साथ रहना चाहती है।
हाईकोर्ट ने CWC के सामने पेश करने की बात कही
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि यदि पुलिस को नाबालिग को उसकी मां के हवाले करने में कानूनी दिक्कत थी, तो उसे चाइल्ड वेलफेयर कमेटी (CWC) के सामने पेश किया जाना चाहिए था। कोर्ट ने नाबालिग को युवक के साथ रहने देने को गंभीर लापरवाही माना।
सुनवाई में एसपी की ओर से यह स्वीकार किए जाने की बात सामने आई कि जांच अधिकारी और थाना प्रभारी से गलती हुई। कोर्ट ने यह भी सवाल किया कि शिकायत मिलने के बाद एसपी की ओर से FIR और कानूनी कार्रवाई के स्पष्ट निर्देश क्यों नहीं दिए गए।
POCSO के तहत कार्रवाई को लेकर कोर्ट ने उठाए सवाल
कोर्ट ने POCSO Act की धाराओं 19, 20 और 21 तथा BNS की धाराओं 198 और 199 का उल्लेख करते हुए नाबालिग से जुड़े मामलों में कानून के अनुसार कार्रवाई की अनिवार्यता पर जोर दिया। सुनवाई के दौरान मेडिकल रिपोर्ट में यौन हमले की पुष्टि होने की बात भी सामने आई।
पुलिस को दिए गए बयान में नाबालिग द्वारा संबंधित युवक के साथ शारीरिक संबंध होने की बात कहे जाने का भी उल्लेख सुनवाई में किया गया।
ब्लड सैंपल संबंधी सर्कुलर पर भी सवाल
हाईकोर्ट ने 23 जनवरी 2026 के एक सर्कुलर पर भी सवाल उठाया, जिसमें प्रत्येक पीड़िता का ब्लड सैंपल लेने के निर्देश दिए गए थे। कोर्ट ने पूछा कि गर्भावस्था की पुष्टि किए बिना इस तरह का व्यापक निर्देश किस आधार पर जारी किया गया।
कोर्ट ने नाबालिग बालिकाओं की सुरक्षा को लेकर सरकार के दावों और इस मामले में पुलिस की कार्रवाई के बीच कथित विरोधाभास पर भी नाराजगी जताई।
अब शिवपुरी एसपी को लिखित जवाब देकर बताना होगा कि शिकायत मिलने के बाद समय पर FIR और अन्य कानूनी कार्रवाई क्यों नहीं की गई। मामले की अगली सुनवाई में पुलिस की ओर से जवाब पेश किया जाएगा।
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