
पिछोर/रानू परिहार की रिपोर्ट: शिवपुरी जिले की पिछोर तहसील के ग्राम मसूदा में बिलरई नदी के शांत तट पर स्थित शंकरघाट महादेव मंदिर इन दिनों सावन माह में श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। प्राकृतिक सौंदर्य से घिरे इस प्राचीन शिवधाम में प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान भोलेनाथ के दर्शन, जलाभिषेक और पूजा-अर्चना के लिए पहुंच रहे हैं।
सावन शुरू होते ही मंदिर परिसर में भक्तों की संख्या लगातार बढ़ी है। सुबह से लेकर देर शाम तक श्रद्धालु जल, दूध, बेलपत्र, धतूरा और पुष्प अर्पित कर भगवान शिव का अभिषेक कर परिवार की सुख-समृद्धि, अच्छी वर्षा और क्षेत्र की खुशहाली की कामना कर रहे हैं। दूर-दराज के गांवों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंच रहे हैं।
प्राकृतिक वातावरण बढ़ाता है आध्यात्मिक अनुभूति
बिलरई नदी के किनारे स्थित यह प्राचीन मंदिर अपनी प्राकृतिक सुंदरता और शांत वातावरण के कारण श्रद्धालुओं को विशेष आध्यात्मिक अनुभूति प्रदान करता है। हरियाली और नदी के मनोरम दृश्य के बीच स्थित यह शिवधाम धार्मिक पर्यटन की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जाता है।
सावन सोमवार पर विशेष आयोजन
श्रावण मास के प्रत्येक सोमवार को मंदिर परिसर में विशेष धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किए जा रहे हैं। सुबह से ही शिवभक्तों की लंबी कतारें लग जाती हैं। इस दौरान भजन-कीर्तन, शिव आरती, रुद्राभिषेक और अन्य धार्मिक कार्यक्रमों से पूरा परिसर भक्तिमय वातावरण में सराबोर रहता है।
वर्षों पुरानी आस्था से जुड़ी है मान्यता
स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार शंकरघाट महादेव मंदिर वर्षों पुराना आस्था का केंद्र है। मान्यता है कि यहां सच्चे मन से की गई प्रार्थना भगवान शिव अवश्य स्वीकार करते हैं। इसी विश्वास के चलते प्रत्येक वर्ष सावन माह में हजारों श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं।
श्रद्धालुओं की सुविधा पर विशेष ध्यान
मंदिर समिति और स्थानीय ग्रामीणों द्वारा श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए स्वच्छता, पेयजल और सुव्यवस्थित दर्शन व्यवस्था सुनिश्चित की जा रही है। स्थानीय लोगों का मानना है कि इस ऐतिहासिक मंदिर का संरक्षण और विकास होने से क्षेत्र में धार्मिक पर्यटन को भी नई पहचान मिल सकती है।
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