
मध्य प्रदेश के कटनी जिले के स्लीमनाबाद में विंध्य पर्वतमाला के नीचे बनाई जा रही भारत की सबसे लंबी सिंचाई सुरंग का निर्माण पूरा हो गया है। करीब 11.95 किलोमीटर लंबी इस सुरंग को तैयार करने में लगभग 17 वर्ष लगे। यह सुरंग नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण की महत्वाकांक्षी बर्गी डायवर्जन परियोजना का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है।
क्षेत्र में पेयजल एवं औद्योगिक जल आपूर्ति भी बेहतर
यह सुरंग नर्मदा नदी के पानी को पहली बार विंध्य पर्वतमाला के नीचे से सोन नदी बेसिन तक पहुंचाएगी। परियोजना पूरी होने के बाद कटनी, मैहर, सतना, रीवा और पन्ना जिलों के करीब 1,450 गांवों की लगभग 2.45 लाख हेक्टेयर कृषि भूमि को सिंचाई का लाभ मिलेगा। साथ ही जबलपुर और कटनी क्षेत्र में पेयजल एवं औद्योगिक जल आपूर्ति भी बेहतर होगी।
अत्याधुनिक टनल बोरिंग मशीनों का इस्तेमाल
यह भी पढ़े: ‘दोस्ती-दुश्मनी दोनों याद रखता हूं’: नरोत्तम मिश्रा का बड़ा बयान, DM-SP को दी चेतावनी
इस परियोजना की शुरुआत वर्ष 2009 के आसपास हुई थी, लेकिन कठिन भूगर्भीय परिस्थितियों, मशीनों के बार-बार खराब होने, पानी के रिसाव और अन्य तकनीकी चुनौतियों के कारण निर्माण कार्य में कई बार देरी हुई। सुरंग निर्माण के दौरान अत्याधुनिक टनल बोरिंग मशीनों का इस्तेमाल किया गया और सैकड़ों इंजीनियरों एवं श्रमिकों ने वर्षों तक लगातार काम किया।
जल संकट कम होने की उम्मीद
शुरुआत में इस परियोजना की अनुमानित लागत करीब 799 करोड़ रुपये थी, जो समय के साथ बढ़कर लगभग 1,600 करोड़ रुपये तक पहुंच गई। इसके बावजूद इसे मध्य प्रदेश की सबसे महत्वपूर्ण सिंचाई परियोजनाओं में शामिल माना जा रहा है, क्योंकि इससे विंध्य क्षेत्र में कृषि उत्पादन बढ़ने और जल संकट कम होने की उम्मीद है।
कृषि विकास की दिशा में बड़ा कदम
यह सुरंग केवल एक इंजीनियरिंग उपलब्धि नहीं, बल्कि प्रदेश के सूखाग्रस्त क्षेत्रों के लिए भविष्य में जल सुरक्षा और कृषि विकास की दिशा में बड़ा कदम साबित होगी।
ये भी पढ़े – दिल्ली में बीजेपी की अहम बैठक: संगठन में बड़े बदलाव और राजनीतिक रणनीति पर मंथन
- sleemanabad-longest-irrigation-tunnel-completed-madhya-pradesh







