
भोपाल। मध्यप्रदेश में स्मार्ट मीटर को लेकर सियासत एक बार फिर गरमा गई है। पूर्व विधायक नारायण त्रिपाठी ने स्मार्ट मीटर व्यवस्था पर तीखा हमला बोलते हुए इसे आम आदमी और गरीबों के लिए “मुसीबत” बताया है। उन्होंने आरोप लगाया कि स्मार्ट मीटर की वजह से उपभोक्ताओं को भारी-भरकम बिजली बिल मिल रहे हैं, जिससे लोगों का जीना मुश्किल हो गया है।
गरीब बिजली जलाना छोड़ रहे हैं
नारायण त्रिपाठी ने कहा कि स्मार्ट मीटर के कारण बिजली बिल इतने ज्यादा आ रहे हैं कि गरीब वर्ग के लोग अब बिजली का उपयोग करने से भी डरने लगे हैं। उन्होंने दावा किया कि कई लोग बिल जमा न कर पाने की स्थिति में कानूनी परेशानियों का सामना कर रहे हैं और अदालतों के चक्कर काटने को मजबूर हैं। उन्होंने यह भी कहा कि हालात ऐसे बन गए हैं कि लोग “पुराने जमाने” की ओर लौटने को मजबूर हो रहे हैं, जहां बिजली का उपयोग सीमित या बिल्कुल नहीं किया जाता था।
यूपी के फैसले का हवाला
नारायण त्रिपाठी ने उत्तर प्रदेश का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां के ऊर्जा मंत्री द्वारा स्मार्ट मीटर पर रोक लगाने के निर्देश दिए गए हैं। उनके मुताबिक, यह फैसला इस बात का संकेत है कि सरकार को स्मार्ट मीटर की “हकीकत” समझ में आ चुकी है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि यूपी में आगामी चुनावों को देखते हुए यह निर्णय लिया गया है, लेकिन इससे यह साफ है कि स्मार्ट मीटर व्यवस्था में गंभीर खामियां हैं।
एमपी सरकार से सीधी अपील
पूर्व विधायक ने मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव से अपील करते हुए कहा कि प्रदेश में किसान, व्यापारी और आम उपभोक्ता सभी स्मार्ट मीटर से परेशान हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री से मांग की कि जनता की परेशानी को देखते हुए तुरंत निर्णय लेते हुए स्मार्ट मीटर पर रोक लगाने के निर्देश जारी किए जाएं।
सियासत तेज, फैसला बाकी
स्मार्ट मीटर को लेकर उठ रहे सवालों और राजनीतिक बयानबाजी के बीच अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि मध्यप्रदेश सरकार इस मुद्दे पर क्या रुख अपनाती है। फिलहाल, यह मामला आम जनता की जेब और राहत से सीधे जुड़ा हुआ है, जिससे आने वाले दिनों में इस पर और बहस तेज होने की संभावना है।
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